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Haldwani: MBPG में पुरानी किताबों से पढ़ने के लिए मजबूर हैं विद्यार्थी, छात्र-छात्राओं ने कार्रवाई की मांग की

Tue, 08 Apr 2025 04:32 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी

सार

एमबीपीजी में छात्र-छात्राएं पुरानी किताबों से पढ़ने को मजबूर हैं। महाविद्यालय के पुस्तकालय में किताबों की भी कमी है। कारण यह है कि पुराने छात्र-छात्राओं ने पढ़ने के लिए ले जाने के बाद किताबें लौटाई नहीं। 
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हल्द्वानी एमबीपीजी कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक ओर केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति लागू कर दी है, दूसरी ओर कुमाऊं के सबसे बड़े महाविद्यालय में छात्र-छात्राएं पुरानी किताबों से पढ़ने को मजबूर हैं। महाविद्यालय के पुस्तकालय में किताबों की भी काफी कमी है। कारण यह है कि पुराने छात्र-छात्राओं ने पढ़ने के लिए ले जाने के बाद किताबें लौटाई नहीं। ऐसा करने वालों पर जरूरतमंद छात्र-छात्राओं ने कार्रवाई की मांग की है।

एमबीपीजी महाविद्यालय में वर्तमान में 13,500 से अधिक छात्र-छात्राएं हैं। सरकारी महाविद्यालय होने के चलते यहां कम आय वाले परिवारों के बच्चे ही ज्यादा हैं। नई शिक्षा नीति लागू होने और महाविद्यालय में किताबों की कमी को देखते हुए नई किताबें खरीदने के लिए करीब छह माह पूर्व महाविद्यालय प्रशासन ने शासन को 15 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। छह माह से अधिक समय बीतने के बाद भी शासन से इसे स्वीकृति नहीं मिली है।

राजनीति विज्ञान तृतीय सेमेस्टर की छात्रा नीलम का कहना है कि हैं वह किताब लेने के लि ए पुस्तकालय गईं। वहां किताब नहीं होने का हवाला देकर उन्हें लौटा दिया गया। अब वह 450 रुपये की किताबें लेकर पढ़ाई कर रही हैं। बीकाम द्वितीय सेमेस्टर के मोहित का कहना है कि पुस्तकालय की किताबें काफी पुरानी हो गई हैं। इसलिए नई किताबों को मंगाने की आवश्यकता है।

फर्नीचर खरीदने के लिए भी नहीं मिली स्वीकृति

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एमबीपीजी महाविद्यालय में फर्नीचर नहीं होने के कारण छात्र-छात्राएं परेशान हैं। महाविद्यालय प्रशासन ने फर्नीचर खरीदने के लिए 15 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। ये प्रस्ताव भी छह माह से अधिक समय से शासन में धूल फांक रहा है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि एक ओर सरकार ने महाविद्यालयों में 75 प्रतिशत उपस्थिति को लागू कर दिया है, दूसरी ओर सरकार छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए फर्नीचर उपलब्ध नहीं करा पा रही है। 

किताबें और फर्नीचर खरीदने के लिए शासन को 15 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा है। जैसे ही प्रस्ताव को स्वीकृति मिलेगी, व्यवस्थाओं में सुधार कर लिया जाएगा। पुराने जो छात्र महाविद्यालय से किताबें ले गए हैं उनसे किताबें लौटाने की अपील की गई है। -प्रो.एनएस बनकोटी, प्राचार्य, एमबीपीजी हल्द्वानी।

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