बेस और महिला अस्पताल में ओपीडी बहिष्कार के बाद मंगलवार रात पुलिस ने कांग्रेसी नेता सैय्यद इशरत अली को अब्दुल्ला बिल्डिंग के पास से गिरफ्तार कर लिया। उस पर बेस में डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के एक बड़े नेता के हस्तक्षेप पर वह पुलिस के हाथ लगा है।
सोमवार की रात लाइन नंबर 17 में पुलिस जब इशरत को पकड़ने गई तो लोगों के हंगामे के बीच वह भाग गया था। पुलिस को बैंरग लौटना पड़ा था। इससे नाराज डाक्टरों ने मंगलवार को ओपीडी का बहिष्कार किया। सोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय और राजकीय महिला अस्पताल की ओपीडी ठप रहने के कारण दो हजार मरीजों को लौटना पड़ा।
डॉक्टर मेडिकल प्रोटेकशन एक्ट 2013 के तहत इशरत के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे थे। डॉक्टरों ने मंगलवार को ओपीडी का बहिष्कार किया और एक भी मरीज नहीं देखे। बेस अस्पताल में प्रतिदिन 12 सौ 15 सौ मरीज ओपीडी में आते हैं। जबकि महिला अस्पताल में प्रतिदिन चार सौ से पांच सौ मरीज ओपीडी में आते हैं।
दोनों अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं सुचारु रूप से चली। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को देखा गया। मंगलवार को आने वाले मरीजों की जांचें भी नहीं की गईं। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ हल्द्वानी शाखा के अध्यक्ष डॉ. डीएस पंचपाल ने गिरफ्तारी न होने पर बुधवार से पूरे जिले में ओपीडी सेवाएं बंद रखने का ऐलान किया था।
इंदिरा के दरबार में पहुंचा था मामला
कानूनी रूप से इशरत को घिरते देख कांग्रेस नेता अब्दुल मतीन सिद्दीकी मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश के दरबार में पहुंचे। दोनों नेताओं की बंद कमरे में पूरे मामले पर काफी देर तक बात हुई।
इस संबंध में नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि सीएमएस के समक्ष दोनों पक्षों में समझौता हो गया था और इशरत एवं डॉक्टर गले मिल लिए थे। मामले में सियासत हो रही है। उन्होंने कहा कि माफी मांगने पर अगर डाक्टर मान जाते हैं तो ठीक हैं नहीं तो इशरत को सरेंडर कराने के लिए कहा है।
पुलिस समर्पण का इंतजार करती रही
पुलिस सोमवार की फजीहत होने के बाद भी मंगलवार को हरकत में नहीं दिखी। सभी पुलिसकर्मी जानते थे कि धक्का देकर छुड़ाने वाले कौन हैं इसके बाद भी ठोस रणनीति बनाने के बजाय इशरत के समर्पण का इंतजार करती रही है।
एसपी सिटी और सीओ चोरी के मामलों को छानबीन में लग गए। थानों की पुलिस दैनिक कार्य करने में व्यस्त रही। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर दिनभर मुखानी पुलिस कोतवाली थाने में बैठी रही। इधर कांग्रेस नेताओं की बड़ी कोठी स्थित गोपनीय स्थान पर गंभीर बैठक हुई। बैठक के दौरान आरोपी के समर्पण के मुद्दे पर मंत्रणा हुई है।
कोठी में पंचायत के बाद बनी बात
यह तो सभी जानते हैं कि इशरत अली पूर्व दर्जा राज्यमंत्री अब्दुल मतीन सिद्दीकी के घर से फरार हुआ था। इस मामले में पुलिस टीम गोपनीय रजिस्टर में रिपोर्ट दर्ज कर चुकी है। पुलिस बवाल के मामले में रात ही मुकदमा दर्ज करने जा रही थी लेकिन पुलिस अधिकारियों ने काफी विचार विमर्श करने के बाद ऐसा नहीं किया।
मंगलवार शाम के समय बड़ी कोठी में पंचायत के बाद कांग्रेस के दो नेता पुलिस अधिकारियों से वार्ता करने के लिए गए। समझौते के तहत गिरफ्तारी का ब्योरा बनाया गया। रात में आरोपी लाइन नंबर 17 में लोगों से मुलाकात करने के बाद पुलिस के पास आया।
अब फरार कराने और आरोपी को संरक्षण देने वाली धारा पुलिस लगाएगी या नहीं। यह बड़ा सवाल है। पुलिस अधिकारी इस बारे में कुछ भी स्पष्ट रूप से बताने तैयार नही हैं।