राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के सहयोग और हिमालयन सोसायटी फार हैरिटेज एंड आर्ट कंजरवेशन की ओर से नैनीताल में पांडुलिपि संरक्षण की राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हो गई है। कार्यशाला एक माह तक चलेगी। जिसमें कई राज्यों के 20 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
उद्घाटन करते हुए सोसायटी के निदेशक अनुपम साह ने बताया कि पांडुुलिपि संरक्षण का काम 2003 से केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने शुरू किया। इस समय तीन तरह के काम चल रहे हैं। एक टीम दुर्लभ पांडुलिपियों को खोजने, दूसरी उन्हें संरक्षित करने और तीसरी उन्हें डिजिमाइटेशन कर रही है। ताकि पांडुलिपियां समाप्त होने के बाद भी उनका अस्तित्व बना रहे। उन्होंने बताया कि संरक्षण कार्य में पांडुलिपियों का जीवन बढ़ाना, उन्हें बचाना, उनका उचित ट्रीटमेंट आदि किया जाता है।
इसके अलावा पांडुलिपि किस कागज की बनी है, कितनी पुरानी है और उसका वातावरण पर किसी तरह का प्रभाव पड़ता है या नहीं आदि की जानकारी दी जाएगी। प्रतिभागियों को विशेषज्ञ ललित पाठक, ओंकार काडू प्रशिक्षण दे रहे हैं। कार्यशाला में उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू कश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के प्रतिभाग भाग ले रहे हैं।