ढाई साल की उम्र में बच्चे को गाते गुनगुनाते देखा तो मां ने नजर अंदाज न कर उसे प्रोत्साहित किया। नतीजन, बेटा सात जनवरी से स्टार प्लस में शुरू हो रहे दिल है हिंदुस्तानी कार्यक्रम के टॉप टेन कांटेस्टेंट में जगह बना चुका है।
ओखलकांडा ब्लॉक के दूरस्थ गांव भीड़ापानी निवासी दिग्विजय उर्फ दिग्गी (23) ने यह मुकाम हासिल किया है। दिग्गी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उन्होंने दिल्ली विवि के किरोड़ीमल कॉलेज से बीएससी किया है।
बताया कि बचपन से ही गाने का शौक था। पढ़ाई के साथ-साथ शौक को भी पूरा समय दिया। इससे उसकी राह आसान हो गई। उन्होंने दस साल की उम्र में गाजियाबाद स्थित गंधर्व संगीत महाविद्यालय में दाखिला लिया और लगभग तीन साल कड़ा रियाज किया।
दिग्गी के पिता की प्राइवेट नौकरी के चलते उन्होंने भोपाल, गाजियाबाद आदि शहरों में पढ़ाई की है। उनके खाते में कई उपलब्धियां दर्ज हैं। उन्होंने दस साल की उम्र में गाजियाबाद स्थित गंधर्व संगीत महाविद्यालय में दाखिला लिया और लगभग तीन साल कड़ा रियाज किया।
उन्होंने जी टीवी पर प्रसारित लिटिल चैंप्स-2006 में टॉप 20 में स्थान सुरक्षित किया। 2008 में स्टार प्लस के छोटे उस्ताद में टॉप 20 में रहे। वह कलर्स के कार्यक्रम इंडिया गॉट टैलेंट के सेमीफाइनल राउंड तक भी पहुंचे।
वह कॉलेज की तरफ से आयोजित होने वाली कानपुर आईआईटी कॉलेज गायिकी प्रतियोगिताओं में भी तीन साल तक लगातार अव्वल रहे। स्नातक के बाद 2014 में एक निजी रेडियो चैनल 92.7 बिग एफएम के कार्यक्रम बिग गोल्डन वॉइस में पहले रनर अप रहे।
गायक शंकर महादेवन ने उनकी पीठ थपथपाते हुए फिल्म कट्टी-बट्टी में गाने का मौका दिया। उनकी आवाज में गाए गए गाने जागो मोहन प्यारे को खूब सराहा गया। वह संगीत निदेशक सलीम सुलेमान साहब के साथ वेडिंग पुलाव फिल्म में भी काम कर चुके हैं।
हॉलीवुड फिल्म अन इंडियन के हिंदी गाने में भी वह अपने सुर बिखेर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई में तो सिर्फ सपने बसते हैं, लेकिन उत्तराखंड में जान बसती है। कहा कि कई और टैलेंट गांवों में छुपे हैं उन्हें भी आगे लाने का प्रयास किया जाएगा।
दिग्गी की मां चंद्रा पडियार गृहणी हैं, जबकि पिता किशन पडियार प्राइवेट कंपनी में प्रबंधक हैं। उनके भाई अंकित भी गायन का शौक रखते हैं।