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अनुसूचित जनजाति आरक्षण के लिए रायशुमारी

Mon, 04 Jan 2016 12:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी।
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उत्तराखंड में राजकीय सेवाओं में लागू अनुसूचित जनजाति आरक्षण के संबंध में राय जानने के उद्देश्य से अनुसूचित जनजाति आरक्षण समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्य सचिव नृप सिंह नपलच्याल ने जोहार भवन में जनजाति के लोगों के साथ बातचीत की।
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पूर्व मुख्य सचिव ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार आरक्षण की व्यवस्था लागू है। वर्तमान में उत्तराखंड में राजकीय सेवाओं में चार प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण है। बदलते दौर में भौगोलिक परिस्थितियों एवं जनसंख्या के आधार पर नए सिरे से आरक्षण प्रतिशत में बदलाव किया जाना है।

देहरादून में जौनसारी, ऊधमसिंह नगर में थारू, बोक्सा के अलावा नैनीताल और पिथौरागढ़ में भोटिया जनजाति के अलावा अन्य जनजाति के लोग काफी बड़ी तादात हैं।

राजकीय सेवाओं में जनजाति के लोगों को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिल सके, इसके लिए सरकारी स्तर पर चिंतन किया जा रहा है। किसी ठोस रणनीति एवं नियम को पारित करने से पहले जरूरी है कि जनजाति के अनुभवी लोगों की रायशुमारी जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि धारचूला, मुनस्यारी, खटीमा, बाजपुर और देहरादून में बैठकें आयोजित कर लोगों के सुझाव लिपिबद्ध किए गए हैं। हल्द्वानी के लोगों के विचारों को जानने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट जनवरी अंत तक सरकार को सौंपेगी।

नपलच्याल ने कहा कि जनजाति के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में शिक्षण कार्य के लिए गढ़वाल मंडल में एकलव्य विद्यालय संचालित है, जबकि कुमायूं मंडल में यह विद्यालय खोलने के लिए समिति सरकार से सिफारिश करेगी।

बैठक में डीआईजी कुमायूं पुष्कर सिंह सैलाल ने कहा कि वर्तमान में जो चार प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण है वह कम है। इसे बढ़ाकर लगभग छह प्रतिशत किया जाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश में आरक्षण 7.5 प्रतिशत है।

 सेवानिवृत्त अधिकारी डीएस मर्तोलिया ने कहा कि किसी भी व्यवस्था एवं नियम को बनाने के लिए जनसंख्या मुख्य आधार होता है। अनुसूचित जनजाति समुदाय की जनसंख्या में भी वृद्धि हुई है, लेकिन हमारी जनजाति के आंकडे़ काफी पुराने हैं, लिहाजा नए सिरे से जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों की जनगणना कराई जाए।

सेवानिवृत्त संभागीय विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह धर्मसत्तू ने कहा कि जनजाति के बच्चों के लिए जो आश्रम पद्धति विद्यालय एवं जनजाति छात्रावास संचालित हैं उनमें सुविधाओं को बढ़ाई जाए, ताकि जनजाति समुदाय के बच्चों की प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो।

सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारी डा. एमएस लसपाल ने कहा कि राजकीय सेवाओं में आउटसोर्सिंग से तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को बहुतायत में नियोजित किया जा रहा है। आउटसोर्सिंग के जरिए सेवायोजित होने वाले लोगों में अनुसूचित जनजाति के आरक्षण का अनुपालन कराया जाए।

समिति सदस्य ब्लॉक प्रमुख दान सिंह राणा, अपर सचिव समाज कल्याण रमेश चंद्र लोहनी, जिला समाज कल्याण अधिकारी केसी कफौला, दुर्गा सिंह रावत, पीएस कुटियाल, देव सिंह दरियाल, मदन सिंह ग्वाल, भूपेंद्र सिंह पांगती, डा. डीएस रौतेला, डा. सीएस हयांकी, डा. एनएस पांगती, डा. पीएस मर्तोलिया, एमएस धर्मसत्तू, पुष्कर सिंह मर्तोलिया, वासुदेव आर्य, गोकरण सिंह धर्मसत्तू, प्रेम सिंह मर्तोलिया, मुकुल सिंह पांगती, प्रहलाद सिंह पंचपाल, कुंवर सिंह राणा, जय बहादुर गुंज्याल, गंगा सिंह पंचपाल, लाजवंत सिंह पांगती, उत्तम सिंह जंगपांगी, ललित बृजवाल, सत्यवान जंगपांगी, गीता रावत, द्रोवती पांगती, नंदा टोलिया, डीएस नपलच्याल, दुर्गेश सिंह ने विचार रखे।
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