पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का 90वां जन्मदिन मनाने यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में यहां पहली बार आए अखिलेश यादव बरेली-बागेश्वर मार्ग के नाम का ऐलान और अलग अंदाज में खुद के काम करने के तरीके को गिनाकर सपा की ‘जमीन’ तैयार कर गए।
ऐसा कर कहीं सड़क के रास्ते उत्तराखंड में सपा के घुसने की तैयारी तो नहीं है। चंद मिनटों के भाषण में अखिलेश ने एक तरफ यूपी और उत्तराखंड के तमाम मसलों पर हर संभव सहयोग करने की बात कहकर तालियां बटोरीं तो दूसरी तरफ इसी मंच से अपने नेताओं को नसीहत भी दे दी।
अखिलेश इस सड़क के उद्घाटन के मौके पर बरेली में भी मार्ग का नामकरण कर सकते थे, लेकिन उन्होंने इस बड़े मौके को हाथ से जाने नहीं दिया।
कांग्रेस के गढ़ में संपर्क मार्ग एनडी के नाम करने की घोषणा कर यहां की जनता को उन्होंने विकास पुरुष एनडी तिवारी और रोहित शेखर के करीबी होने का संदेश देने की कोशिश भी की।
इस दौरान उनका यह भी प्रयास रहा कि पुराने दिनों की कड़वी यादें भुलाई जाएं और दोनों प्रदेशों के बीच दूरियां कम हों। उन्हाेंने पूरे आत्मविश्वास से कहा कि यूपी में जब तक उनकी यानी समाजवादी पार्टी की सरकार है, तब तक उत्तराखंड-यूपी के बीच के हर उलझे मसले को सुलझाने में हर संभव सहयोग करेंगे।
कहा तो जा रहा था कि यह गैर राजनीतिक कार्यक्रम है, लेकिन अखिलेश अपने उत्तराखंड से जुड़े चुनिंदा निर्णयों को गिनाकर उपस्थित जनसमूह को यह बताते में कामयाब रहे कि उनके काम करने का अंदाज अलग है।
चाहे रोडवेज बस का विवाद हो या मेडिकल कॉलेज में पीजी सीटों को मामला। अपने त्वरित फैसलों को गिनाकर अखिलेश ने यह संदेश दिया कि नेताजी (मुलायम सिंह) ही नहीं, उनकी सोच भी समरसवादी है और उनकी सरकार उत्तराखंड के लोगों के दुखों को बांटने में हर संभव सहयोग कर रही है।
भाषण के अंत में अखिलेश अपने नेताओं को नसीहत भी दे गए। प्रेम प्रकाश का नाम लेते हुए कहा कि एक समय वह हल्द्वानी से हार गए और बिहार बॉर्डर से सपा के टिकट पर जीत गए। अब उन्हें ही तय कर करना है कि आगे वह कहां से लड़ेंगे। उनके कहने का मतलब साफ था कि यदि उन जैसे नेताओं को उत्तराखंड से लड़ना है तो पहले सियासी जमीन तैयार करनी होगी।