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सोशल मीडिया पर मजाक बन सकता है सजा का सबब 

Sun, 23 Oct 2016 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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हल्‍द्वानी में एचएन इंटर कालेज में अमर उजाला द्वारा आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम साइबर क्राइम के बारे में जानकारी देते एसएसपी जन्मेजय खंडुरी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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खुद सरकारी स्कूल में पढ़े-लिखे एसएसपी जन्मेजय खंडूरी जब यहां के एक सरकारी स्कूल में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला में सादी वर्दी में पहुंचे तो उन्हें पुराने दिनों की याद ताजा हो गई और विद्यार्थियों से खुलकर बात की।
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उन्होंने छात्र-छात्राओं को चेताया कि फेसबुक या सोशल मीडिया पर किया गया मजाक भी सजा का कारण बन सकता है। किसी व्यक्ति या महिला की इच्छा के बगैर उसके फोटो का दुरुपयोग साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है। इस कारण सोच समझकर ही सोशल मीडिया का प्रयोग करना चाहिए। 

एचएन इंटर कालेज में शनिवार को आयोजित पुलिस की पाठशाला में छात्रों को संबोधित करते हुए एसएसपी ने बताया कि तरंगों का दुरुपयोग साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है। यदि किसी को अपमानित करने के इरादे से एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति का फोटो वायरल करता है तो अपराध के दायरे में आ जाता है।
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इस मामले में शिकायत होने पर पुलिस साइबर एक्ट के तहत कार्रवाई करेगी। यदि चरित्र हनन के इरादे से अपराध किया गया है तो ऐसे मामले में दो साल से लेकर सात साल तक सजा हो सकती है। आजकल साइबर अपराधी फेक कॉल कर लोगों को लाटरी लगने का मैसेज देते हैं।

बैंक अधिकारी बनकर एटीएम कार्ड का पासवर्ड या नंबर पूछ लेते हैं। भावुक होकर लोग एटीएम का नंबर बता देते हैं। इसका फायदा उठाकर अपराधी खाते से पैसे निकाल लेता है। लोगों को सोचना चाहिए कि बैंक के पास खाता से लेकर पूरा डाटा होता है।

बैंक अधिकारी क्यों खाता नंबर या एटीएम नंबर पूछेगा। ठगी का शिकार होने के बाद लोग पुलिस और बैंक का चक्कर लगाते हैं। यदि किसी छात्र या छात्रा की फोटो लेकर कोई ब्लैक मेल कर रहा है तो इसकी सूचना तत्काल माता पिता या अपने अध्यापक को देनी चाहिए।

अपनी सूचना शेयर नहीं करने पर छात्र अपराध बोध करते हुए गलत कदम उठा लेते हैं। यदि अभिभावकों से अपनी बात शेयर करें तो उसका निदान आराम से निकल जाएगा। 

एआरटीओ डॉ. गुरदेव सिंह ने बताया कि गाड़ी चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस, इंश्योरेंस, प्रदूषण सर्टिफिकेट होना चाहिए। दो पहिया वाहन चालकों के हेलमेट का प्रयोग करने से जीवन बच सकता है। सीपीयू के आने पर लोगों ने हेलमेट पहनना शुरू किया और 30 फीसदी दुर्घटनाएं कम हो गईं।

 इसी प्रकार कार दुर्घटना के समय सीट बेल्ट लगाने वाला व्यक्ति बच सकता है। दुर्घटना के समय गुब्बारा सीट बेल्ट लगाने पर ही काम करता है। सड़क पर कार से यात्रा करते समय केला का छिलका या रैपर फेंकने पर दुर्घटना हो सकती है।

कोई साइकिल या बाइक सवार फिसलकर घायल हो सकता है। इस कारण रोड पर गंदगी करना ठीक नहीं है। सुरक्षित चलने के लिए रोड पर लगे चिन्हों, चौराहे पर लाइट का ध्यान रखना चाहिए।

इस बीच आरआई देवेंद्र नेगी ने रोड साइन के बारे में जानकारी दी। कालेज के अध्यापक विपिन चंद्र पांडे ने ट्रैफिक सुरक्षा से संबंधित ‘गीत मानोगे जब नियम हमारा’ गाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का संचालन दामिनी अरोड़ा ने किया।  कालेज के प्रधानाचार्य बीएस सामंत ने कार्यक्रम के प्रति अमर उजाला का आभार जताया। सबसे पहले छात्राओं ने स्वागत गीत गाया। इसके बाद पाठशाला के अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

 प्रोजेक्टर के जरिए रोड साइन की दी जानकारी 
आरआई देवेंद्र नेगी ने प्रोजेक्टर के माध्यम से छात्रों को बताया गया कि रोड क्रास करने पर दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। सीट बेल्ट न लगाने और चलते समय मोबाइल पर बात करते समय कैसे लोग दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। बगैर हेलमेट कैसे जान चली जाती है। छात्र प्रोजेक्टर पर लघु फिल्मों को देखकर काफी प्रभावित हुए। 

छात्रों के सवाल एसएसपी के जवाब

नावेद अली- ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान रुपए को लेकर होने वाली जालसाजी से कैसे बचा जा सकता है?
एसएसपी- अपने ई-मेल एकाउंट और खाते से ट्रांजेक्शन करने पर कोई जालसाजी नहीं होती, लेकिन दूसरे के एकाउंट से लागइन करने या ट्रांजेक्शन करने पर ऐसा खतरा रहता है।
 
विवेक कुंदु- फेसबुक आदि की आईडी हैक होने पर क्या करना चाहिए? आईडी का दुरुपयोग रोकने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
एसएसपी- कोई भी आईडी हैक होते ही सूचना पुलिस को दें। इससे पुलिस आईपी एड्रेस को ट्रेस कर अपराधी तक आसानी से पहुंच सकती है। सावधानी के तौर पर आईडी की प्राइवेसी सख्त रखनी चाहिए। अपनी कोई भी ऐसी जानकारी एकाउंट में न रखें जो निजी हो।

मुकुल कुमार- ओवर स्पीड गाड़ियों की शिकायत को लेकर क्या करना चाहिए?
एसएसपी- ओवर स्पीड गाड़ियों की सूचना तत्काल पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100 पर दें। अपराधी अक्सर अपराध करने के बाद वाहन को ओवर स्पीड चलाता है। आपकी सूचना पर पुलिस अपराधी तक आसानी से पहुंच सकेगी और ऐसे में आप पुलिस के साथ ही समाज की मदद कर सकते हैं।

मोहित उप्रेती - वाहन चलाने के लिए 18 वर्ष की आयु सीमा ही क्यों तय है?
एसएसपी- देश में एक आयु तय है, शोधों से पता चला है कि 18 वर्ष में व्यक्ति परिपक्व हो जाता है। मतदान आदि के लिए भी 18 वर्ष की आयु सीमा तय है, इसलिए ड्राइविंग लाइसेंस भी 18 वर्ष की उम्र में ही बनता है। 
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