फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘छोटे हो, छोटों की तरह रहो, मुंहजोरी मत करो’

Sun, 11 Dec 2016 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
विज्ञापन
‘छोटे हो, छोटों की तरह रहो, मुंहजोरी मत करो’ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
घरों को उजड़ने से बचाने के लिए वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश के घर पहुुंचे गफूर बस्ती के लोगों को शनिवार को वित्त मंत्री से सियासत न करने की नसीहत मिली। जुलूस लेकर घर पहुंचे गफूर बस्ती के लोगों से इंदिरा ने साफ कहा कि छोटे हो, छोटे की तरह रहो, मुंहजोरी मत करो। खासे हंगामे के बाद गफूर बस्ती के काफी लोग असंतुष्ट ही वापस लौटे।
विज्ञापन


शनिवार को पार्षद लईक कुरैशी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने जुलूस निकाला और वित्त मंत्री के घर पर पहुंचे। वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने वार्ता शुरू होते ही मामले में राजनीति करने वालों पर निशाना साधा और लोगों को बचने की सलाह भी दे डाली।

इंदिरा का कहना था कि वह बस्ती को न उजड़ने देने के लिए हर स्तर पर कोशिश कर रही हैं। इंदिरा की नाराजगी भी मौके पर खुल कर सामने आ गई। आठ दिसंबर को कोर्ट के आदेश पर गफूर बस्ती का सीमांकन का काम होना था और उस दिन तीन अलग-अलग धड़ों ने बस्ती में धरना देकर विरोध जताया था।
विज्ञापन


इंदिरा का कहना था कि उस दिन जब वित्त मंत्री के मुर्दाबाद के नारे लग रहे थे तो आज उनके घर आने वालों ने उस दिन इंदिरा हृदयेश के जिंदाबाद के नारे क्यों नहीं लगाए। वित्त मंत्री ने कहा कि मामले में राजनीति की जा रही है। जो राजनीति करेगा, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसी बीच पार्षद लईक कुरैशी समर्थकों ने भी मालिकाना हक, बस्ती नहीं उजड़ेगी? जैसे सवाल किए। इसके बाद वित्त मंत्री के समर्थक गोविंद बिष्ट इन लोगों से भिड़ गए। दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हुआ जो थोड़ी ही देर में हंगामे में बदल गया।

बाद में पुलिस ने पार्षद और साथ आए लोगों को वित्त मंत्री के घर से बाहर कर दिया। घर के बाहर जमा लोगों की नाराजगी बढ़ने लगी तो वित्त मंत्री खुद भी बाहर निकल आईं। इंदिरा ने सीधे माइक थामा और कहा कि लोगों को उजड़ने नहीं दिया जाएगा।

हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पैरवी होगी। इस मामले में सीएम हरीश रावत ने फोन कर मामले की जानकारी ली है। सरकार साथ में है। पुनर्वास के लिए जमीन तलाशी गई, पर पहला प्रयास है कि उजड़ने की ही नौबत न आए।

मैं भी आप लोगों से नाराज हूं। मैं मिलना नहीं चाहूंगी तो क्या मिल पाओगे मुझसे। शांति से बात करने के लिए घर बुलाया था और तुम हंगामा कर रहे हो। आप सब लोग वापस जाओ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें