राज्य में सहकारी दुग्ध संघों की हालत दिन-प्रतिदिन खस्ता होती जा रही है। राज्य के छह दुग्ध संघ घाटे में चल रहे हैं। वहीं उत्तरकाशी, चंपावत सहित पांच दुग्ध संघों ने उत्तराखंड कॉरपोरेटिव डेरी फेडरेशन की लाज बचाई हुई है। उत्तराखंड कोऑपरेटिव डेरी फेडरेशन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य में दुग्ध संघ मात्र चार प्रतिशत की बढ़ोत्तरी ही कर पाए हैं।
राज्य बनने के बाद से दुग्ध बिक्री में सहकारी संघ का कब्जा था। सहकारी संघ आंचल ब्रांड से राज्य में दूध और दुग्ध पदार्थों की बिक्री करता है। लेकिन सहकारी संघों की कार्यप्रणाली और खराब मैनेजमेंट के कारण हर वर्ष दुग्ध संघों का घाटा बढ़ता जा रहा है।
ये स्थिति तब है, जब सरकार की ओर से संघों को कई प्रकार की सब्सिडी दी जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2015-16 में सिर्फ दो दुग्ध संघ घाटे में चल रहे थे, लेकिन 2016-17 में इनकी संख्या बढ़कर छह हो गई। वहीं, पांच दुग्ध संघ ही फायदे में चल रहे हैं। इनमें से सबसे अच्छी स्थिति चंपावत और उत्तरकाशी की है। इधर, सबसे ज्यादा दूध बेचने में नैनीताल दुग्ध संघ प्रथम स्थान पर है।
प्राइवेट कंपनियों ने बनाई हुई है बढ़त
दो वित्तीय वर्ष की बात करें तो प्राइवेट कंपनियों ने उत्तराखंड में दूध और दुग्ध उत्पादों को बेचने में बढ़त बनाई हुई है। उत्तराखंड कोऑपरेटिव डेरी फेडरेशन की रिपोर्ट के अनुसार प्राइवेट डेयरी के उत्पादों की बिक्री 20 प्रतिशत तक बढ़ी है।
इन दुग्ध संघों का बढ़ा घाटा-
ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नई टिहरी, पौड़ी, चमोली
ये दुग्ध संघ हैं फायदे में -
चंपावत, उत्तरकाशी, हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल
प्रदेश में आंचल ब्रांड की बिक्री में पिछले वित्तीय वर्ष में चार प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। जो दुग्ध संघ घाटे में चल रहे हैं, उनको उबारने का प्रयास किया जाएगा।
- आनंद स्वरूप एमडी उत्तराखंड कोऑपरेटिव डेरी फेडरेशन