छापे के विरोध में डाक्टरों ने शुक्रवार को दो घंटे तक ओपीडी ठप रखी, जिस कारण काउंटर से भी दवा का वितरण नहीं हुआ। ओपीडी में पहुंचे मरीज दो घंटे तक भटकते रहे। वहीं, डाक्टराें ने वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश से मिलकर कार्रवाई का विरोध किया।
दोपहर एक बजे प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के मंडलीय सचिव डा. प्रदीप पांडे, सचिव डा. एलएम रखोलिया, डा. टीडी रखोलिया, डा. एस अनवर, डा. धीरेंद्र बनकोटी, डा. आरएस सामंत, डा. कल्पना पांडेय, डा. पीएस टाकुली आदि ने वित्त मंत्री से मुलाकात की। डा. पांडे ने डीएम की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगाया। डा. रखोलिया ने अस्पताल के अंदर ही इम्प्लांट और पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराने की मांग की। डा. हृदयेश ने पूरी बात सुनने के बाद डाक्टरों को समर्पण भाव से काम करने को कहा।
उन्होंने कहा कि दवाओं एवं इम्प्लांट अस्पताल में मुहैया कराने को लेकर मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से बात करेंगी। जरूरत पड़ी तो मामले को कैबिनेट में भी लाया जाएगा। उन्होंने डाक्टरों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि पूरे प्रकरण पर डीएम दीपक रावत से वार्ता करेंगी।
वित्त मंत्री के सवाल पर अनुत्तरित हो गए डाक्टर
वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश शुक्रवार को एक शिक्षक की भूमिका में नजर आईं। उनके एक सवाल ने डाक्टरों को अनुत्तरित कर दिया। वित्त मंत्री ने डाक्टरों से पूछा कि सरकार गरीबों को मुफ्त दवा के साथ मुफ्त इलाज दे रही है। कई बार स्वास्थ्य मंत्री कह चुके हैं कि अस्पतालों में बाहर की दवाएं न लिखी जाएं और मरीजों को जेनेरिक दवाएं दी जाएं। क्या अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में जेनेरिक दवाएं नहीं हैं, अगर हैं तो बाहर से दवा क्यों लिखी जा रही है। उन्होंने कहा कि दवाएं नहीं है तो सरकार की कमजोरी है और होने पर वितरण नहीं हो रहा है तो डाक्टरों और अस्पताल की लापरवाही है। डा. हृदयेश ने कहा कि जन आक्रोश सरकार तक बाद में पहुंचता है, लेकिन फौरी तौर पर पहले डाक्टरों को झेलना पड़ेगा।