नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में पहाड़ के दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे छात्र-छात्राओं के लिए पढ़ाई से ज्यादा सिर छिपाने की जगह ढूंढना बड़ी चुनौती बन गया है। प्रतिवर्ष विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के मुकाबले हॉस्टल की सीमित सीटें ज्यों की त्यों हैं, जिसका सीधा आर्थिक बोझ गरीब और मध्यमवर्गीय अभिभावकों पर पड़ रहा है।
पिथौरागढ़, चमोली, बागेश्वर और अल्मोड़ा के किसान परिवारों से आने वाले होनहार छात्र हॉस्टल में जगह न मिलने पर महंगे निजी कमरों या पीजी में रहने को मजबूर हैं। पर्यटन नगरी नैनीताल में एक कमरे का किराया 5,000 से 9,000 रुपये प्रति माह तक है।
इतना ही नहीं, पर्यटन सीजन चरम पर पहुंचते ही अधिक मुनाफे के चक्कर में कई मकान मालिक छात्रों पर कमरा खाली करने का दबाव भी बनाने लगते हैं। वर्तमान में छात्रों के लिए केवल केनफील्ड और छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई, कमला पंत व गौरा देवी छात्रावास उपलब्ध हैं, जो आवश्यकता की तुलना में बेहद नाकाफी साबित हो रहे हैं।
- विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की इस समस्या को लेकर पूरी तरह गंभीर है। शासन को नए छात्रावास के निर्माण के लिए विस्तृत प्रस्ताव बनाकर भेजा है। जैसे ही नैनीताल में छात्रावास बनाने की प्रशासनिक मंजूरी मिलेगी, छात्रहितों को सर्वोपरि रखते हुए तुरंत निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
- प्रो. संजय पंत, डीएसडब्ल्यू, डीएसबी परिसर नैनीताल
- हॉस्टल में सीटें बढ़ाने और छात्रों को इस आर्थिक शोषण से बचाने के लिए हमने कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपे हैं। इस संबंध में दोबारा उच्चाधिकारियों के साथ ठोस वार्ता की जाएगी। अगर जल्द ही सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई गई या छात्रावास नहीं बना तो छात्र महासंघ उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
- आशीष कबड़वाल, अध्यक्ष, छात्र महासंघ, कुमाऊं विश्वविद्यालय