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जर्जर बिजली का पोल गिरा, बाल-बाल बचे लोग

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रामपुर रोड पर अमर उजाला कार्यालय के निकट सड़क पर गिरे जरजर विधुत पोल के कारण लगा जाम। अमर उजाला - फोटो : HALDWANI
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हल्द्वानी। रामपुर रोड पर बृहस्पतिवार की दोपहर लगभग एक बजे बिजली का पोल गिर गया। इससे अफरातफरी मच गई। मार्ग बाधित होने के कारण लंबा जाम लग गया। पोल गिरने के कारण देवलचौड़ फीडर ठप हो गया और दस हजार उपभोक्ताओं की बिजली गुल हो गई।
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दोपहर के ठीक 12:55 बजे थे। अचानक जर्जर पोल सड़क पर गिर गया। इस पोल से 11केवी लाइन गुजर रही थी। जोरदार आवाज हुई। पोल एक बाइक सवार के सिर पर जा टकराया। वह जमीन पर गिर गया। आसपास के लोगों ने उसे बचाया। रुद्रपुर और हल्द्वानी से आने वाले वाहनों के पहिए थम गए। देखते ही देखते लंबा जाम लग गया। उपखंड अधिकारी मोहन राम आर्या के निर्देश पर बिजली विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बिजली के तारों को काटा और पोल को हटाकर 50 मिनट बाद जाम खुलवाया। पोल नीचे से पूरी तरह से गल चुका था।
आठ घंटे तक बिजली गुल रहने के कारण लोगों के इंवर्टर जवाब दे गए। शाम को मोटर न चल पाने के कारण लोगों को पेयजल संकट झेलना पड़ा। हालांकि उपखंड अधिकारी ने दावा किया कि सिर्फ दो ट्रांसफार्मरों की आपूर्ति बाधित रही। शेष आपूर्ति सुचारू कर दी गई थी। देर शाम अधीक्षण अभियंता तरुण कुमार ने मौका मुआयना किया। उन्होंने घटना की जांच के आदेश दिए। रात नौ बजे बिजली व्यवस्था सुचारू हो सकी।
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पोल गला हुआ था, जले के निशान मिले
हल्द्वानी। उपखंड अधिकारी मोहन राम आर्या ने बताया कि पोल नीचे गला हुआ था और उसमें जले के निशान भी मिले हैं। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पोल के आसपास लंबे समय से कोई चीज जलाई जा रही थी। उन्होंने कहा कि मामले की जांच अवर अभियंता से करा रहे हैं और जरूरत पड़ी तो अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे।
फीडर ट्रिप न होता तो हो सकता था बड़ा हादसा
हल्द्वानी। रामपुर रोड पर आवागमन दिनभर रहता है। 11 केवी की लाइन और पोल गिरने पर देवलचौड़ फीडर ट्रिप हो गया। अगर फीडर ट्रिप नहीं होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
जर्जर पोलों का सर्वे कर तीन दिन के भीतर दें रिपोर्ट
हल्द्वानी। ऊर्जा निगम के अधीक्षण अभियंता तरुण कुमार ने जिले के चार अधिशासी अभियंताओं को आदेश जारी किया है कि जर्जर पोलों का सर्वे कराकर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट दें। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर जो पोल अधिक संवेदनशील होंगे उनको सबसे पहले बदला जाएगा। उसके बाद कम संवेदनशील पोलों को बदला जाएगा जबकि कुछ पोलों को गड्ढा खोदकर पोल के आसपास लोहे की वेल्डिंग कराकर मजबूती प्रदान की जाएगी।
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