हल्द्वानी। दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर हल्द्वानी की महिलाओं ने भी आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर और नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सैकड़ों महिलाएं बुधवार को ताज चौराहे पर बेमियादी धरने पर बैठ गईं। उन्होंने केंद्र सरकार से सीएए और एनआरसी को वापस लेने की पुरजोर मांग उठाई। साथ ही संविधान और वतन की धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने का संकल्प लिया।
बुधवार की सुबह बुर्कानशीं महिलाएं एनआरसी और सीएए के खिलाफ नारेबाजी करते और देशभक्ति तराने गाते हुए हुए ताज चौराहे पर धरने देने पहुंच गईं। वे हाथों में सीएए और एनआरसी के विरोध की तख्तियां लहरा रही थीं। उन्होंने सीएए को काला कानून बताया। पुलिस ने महिलाओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन वे मानने के लिए तैयार नहीं थी। सुबह दस बजे शुरू हुआ उनका आंदोलन देर रात तक जारी रहा। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि आंदोलन 72 घंटे तक अनवरत चलाया जाएगा। आंदोलन को समर्थन देने के लिए कांग्रेेस की महिला प्रदेश अध्यक्ष और नैनीताल की पूर्व विधायक सरिता आर्या, जगदीश पाडे, रजनी जोशी चौराहे, बनभूलपुरा संघर्ष समिति के संयोजक उवैस रजा भी पहुंचे।
इन्होंने किया संबोधन
कांग्रेस नेता अब्दुल मतीन सिद्दीकी, हाजी मोहम्मद यूसुफ, सपा नेता शोएब अहमद, इस्लाम मिकरानी, शोएब सिद्दीकी, शबीना सिद्दीकी, तंजील खान (अलीगढ़ मुस्लिम विवि), तरन्नुम, तबस्सुम गजाला, इंशा परवेज, जोया अमीन, सबा नईम, रमशा अब्दुल हन्नान, फातिमा रईस, रिमशा खान, अनवरी, बुशरा, अदीबा हसन, मंतशा परवीन, तैयबा अंजुम, शेबी मुमताज, ज़रीन बेगम शीनम, सुमबुल, महरीन, महज़बीं नुवैरा आदि ने संबोधित किया।
ये भी रहे मौजूद
रईसुल हसन, पार्षद मोहम्मद गुफरान, अरशद अय्यूब, जमील मिकरानी, जावेद सिद्दीकी, सरताज आलम, आसिम जार्डन, अनमत शुमाइला, नाजिया, चंदा नसरीन आदि व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
पुलिस और प्रशासन को नहीं लगी भनक
बनभूलपुरा में महिलाओं के आंदोलन को लेकर मंगलवार की शाम बैठक के दौरान निर्णय लिया गया था लेकिन थानाध्यक्ष सुशील कुमार का कहना है कि उनको भनक नहीं लगी। सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम का भी यही कहना है कि उन्हें आंदोलन की कोई जानकारी नहीं मिली। पुलिस और प्रशासन से धरने के लिए कोई अनुमति भी नहीं ली गई है।
ढपली की थाम पर गाए आजादी के तराने
चेहरे पर नकाब लगाए ताज चौराहे पर सड़क किनारे बैठी महिलाएं अपनी आवाज बुलंद करने के साथ ही ढपली की थाप पर आजादी के तराने गाती रहीं। इस दौरान महिलाओं, खासतौर पर युवतियों और छात्राओं ने मुल्क के हालात से सभी को अवगत कराया।
युवाओं ने खुद संभाली यातायात व्यवस्था
पुलिस के सामने ताज चौराहे पर धरने के दौरान क्षेत्रीय युवाओं ने यातायात व्यवस्था की कमान भी खुद ही संभाली। अक्सर जाम से दोचार होने वाले ताज चौराहे पर बुधवार को धरना देने के बावजूद युवाओं ने यातायात बाधित नहीं होने दिया। वाहन चालकों की खुशामद कर वे सहयोग की अपील करते रहे। जहां जरूरत हुई वहां रूट डायवर्ट भी किया। पुलिस ने शुरू में ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि जाम लगेगा तो इसकी जिम्मेदारी आंदोलनकारियों पर होगी।
नागरिकता बचेगी कैसे, यह भी तो बताओ गृह मंत्री जी
हल्द्वानी। सीएए और एनआरसी को वतन की धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ बताते हुए हल्द्वानी की मुस्लिम महिलाओं ने कहा कि सरकार और उसके नुमाइंदों की कथनी और करनी में अंतर है। बोलीं, बड़े मंचों पर पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह खुले तौर पर कह रहे हैं कि इससे किसी की नागरिकता नहीं छिनेगी, जबकि नागरिकता बचेगी कैसे, यह नहीं बता रहे। उनका कहना है कि सरकार को जनता की आवाज को मद्देनजर रखते हुए अपनी जिद छोड़नी चाहिए।
हल्द्वानी ताज चौराहे पर एनआरसी एवं सीएए के विरोध में धरने पर बैठी मुस्लिम समाज की महिलाएं। अ?