वेतन से मेंटीनेंस कटवाने के बाद भी एचएमटी कर्मियों का परिवार दहशत के साये में जी रहा है। आवासीय भवनों की स्थिति जर्जर हो चुकी है और हाल के दिनों में आए भूकंप के झटकों से घरों के शीशे तक टूट गए।
एचएमटी कर्मियों को 14 माह से वेतन नहीं मिला है। टाइप ए में रहने वाले कर्मियों के वेतन से 120 रुपये प्रतिमाह, टाइप बी में 150 रुपये और टाइप सी में रहने वालों के वेतन से 200 रुपये प्रतिमाह मेंटीनेंस के लिए कटता है। साथ ही कर्मियों को एचआरए (हाउस रेंट एलाउंस) भी नहीं मिलता है। वर्ष 1991 के बाद से आवासीय परिसर का न तो रंग-रोगन कराया गया और न ही मरम्मत।
घरों के छज्जों का प्लास्टर जगह-जगह से गिर गया है। बरसात के दिनों में छत से जगह-जगह से पानी टपकता है। पेयजल की उचित व्यवस्था न होने के कारण महिलाएं धारे से पीने का पानी लाती हैं। छतों पर लगी पानी की टंकियों में बंदर नहाते हैं। कई बार कहने के बावजूद प्रबंधन ने इस ओर आज तक ध्यान नहीं दिया।
नकारात्मक रवैये पर बिफरे सांसद
नौ सूत्रीय मांगों को लेकर एचएमटी संयुक्त संघर्षशील मोर्चा के पदाधिकारी और कर्मचारियों ने 84वें दिन भी धरना जारी रखा। मोर्चे के अध्यक्ष एमएस बिष्ट और संयोजक नारायण राम आर्य ने बताया कि प्रबंधन के टीम को सहयोग न देने पर सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि एचएमटी के प्रति नकारात्मक रुख रखने वाले उच्चाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। दूसरी ओर बुधवार को कर्मचारियों ने प्रबंध निदेशक एस. पालराज और जीएम एससी कांडपाल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान आनंदी आर्या, रेनू आर्या, जया खोलिया, स्वाती शाह, कमला बिष्ट, बीएस डसीला, उमेश चंद, जीवन मनराल आदि थे।