नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद से हल्द्वानी में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण की फाइल भी बुलेट रफ्तार की तरह दौड़ने लगी हैं। जलनिगम ने प्लांट की डीपीआर तैयार कर नगर निगम को सौंप दी है। नगर निगम से फाइल शासन को भेजी जा रही है। शासन से टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी (टीएएस) की स्वीकृति मिलने के साथ प्लांट निर्माण शुरू हो जाएगा।
हल्द्वानी शहरी और देहात का सीवरेज को गौला में छोड़ा जाता है। शहरी क्षेत्र का सीवरेज नालों से होकर गौला में पहुंचता है, जबकि देहाती हल्द्वानी में सेफ्टी टैंक की गंदगी को टैंकरों से भरकर गौला में फेंका जाता है। गौला का पानी पेयजल और सिंचाई के काम में लिया जाता है। नदियों में सीवरेज छोड़ने और गंदगी फेंकने पर एनजीटी ने राज्य सरकारों को कड़ी फटकार लगाई है। इस मामले में नैनीताल जिला प्रशासन को नोटिस तक मिल चुका है।
हल्द्वानी में सीवरेज प्लांट निर्माण की कवायद सालों से चल रही है। जलनिगम पहले भी डीपीआर बना चुका है। नगर निगम ने अमृत योजना में सीवरेज प्लांट को शामिल किया है। प्लांट के लिए गौलापार बाईपास में जमीन आवंटित हो चुकी है। जल निगम संशोधित डीपीआर नगर निगम को सौंप चुका है। प्लांट की लागत 15 करोड़ है, इसमें साढ़े पांच करोड़ नगर निगम के खाते में आ गया है। मेयर डा. जोगेंद्र सिंह रौतेला के मुताबिक प्लांट 28 एमएलडी का बनेगा। टीएसी की स्वीकृति के साथ निर्माण शुरू हो जाएगा।
तीन करोड़ का बनेगा एक अतिरिक्त प्लांट
हल्द्वानी एवं आसपास में अधिकांश इलाकों में सीवरेज लाइन नहीं है। घरों में सेफ्टी टैंक बने हैं। टैंक खाली कर गंदगी को गौला या फिर खुले में फेंका जाता है। ट्रीटमेंट प्लांट परिसर में ही एक अतिरिक्त प्लांट बनाया जाएगा। इस प्लांट की लागत तीन करोड़ आएगी। इसमें सेफ्टी टैंक की गंदगी को ट्रीटमेंट किया जाएगा।
ट्रीटमेंट से बनेगी खाद
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट शुरू होने से गौला को प्रदूषित होने से बचाए जाने के साथ ही खाद भी बनेगी। प्लांट में सीवरेज और सेफ्टी टैंक की गंदगी को ट्रीटमेंट किया जाएगा। पानी साफ करने के बाद उसे जमीन में छोड़ दिया जाएगा। बाकी खाद तैयार की जाएगी।