प्रदेश के सात राजकीय महाविद्यालयों को स्नातकोत्तर (पीजी) की मान्यता दे दी गई है, इसकी मंजूरी शासन ने उच्चशिक्षा निदेशालय को शुक्रवार को ही भेजी है। ये वो डिग्री कालेज हैं, जिनमें स्नातकोत्तर स्तर की कक्षाएं पूर्व से संचालित हो रही थीं, मगर शासन की मान्यता नहीं थी। इनमें राजकीय महाविद्यालय कर्णप्रयाग, नई टिहरी, डोईवाला, स्याल्दे, डाकपत्थर, जयहरीखाल और मानिला कालेज शामिल हैं।
वर्ष 2003 में नई टिहरी में राजकीय महाविद्यालय खोला गया था, जो प्रदेश का एक मात्र ऐसा कालेज है, जिसमें स्नातक विषयों के साथ ही 19 विषयों में स्नातकोत्तर विषयों की पढ़ाई हो रही थी। शासन ने इस कालेज में पीजी विषय पढ़ाने की अनुमति तो दी पर अब तक इसे स्नातकोत्तर महाविद्यालय की मान्यता नहीं दी थी। इसी तरह जयहरीखाल महाविद्यालय में कला, विज्ञान संकाय के विषयों में स्नातकोत्तर विषयों की पढ़ाई करीब पांच साल से हो रही थी।
यही हाल अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे का भी था। इसमें भी विद्यार्थियों के दबाव में शासन ने पीजी विषय तो चालू करा दिए थे, मगर इन्हें भी शुक्रवार को ही पीजी महाविद्यालय का दर्जा मिला सका है। चमोली के कर्णप्रयाग और देहरादून के डाकपत्थर महाविद्यालय भी इसी समस्या से जूझ रहे थे। इन महाविद्यालयों को पीजी की मान्यता उच्चशिक्षा मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश के प्रयासों से ही मिल सकी है। इधर, शासन के अपर सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी की ओर से स्नातकोत्तर किए जाने की स्वीकृति आदेश भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि इन कालेजों में को पीजी की मान्यता दिए जाने से कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।