विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण/प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान रिश्वतखोरी के आरोपी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीपीडीओ) को सात साल के कारावास और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।
विभाग के संयुक्त निदेशक सोहन चंद्र पांडे ने सतर्कता विभाग की ओर से मामले की पैरवी की। उन्होंने न्यायालय को बताया कि ग्राम जमौरा खटीमा निवासी अमरजीत सिंह ने 18 अक्तूबर 2010 को एसपी विजिलेंस को पत्र देकर बताया कि उसका अटल आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था।
आवास निर्माण के लिए पहली किश्त से कार्य कराने के बाद उन्होंने संबंधित वीपीडीओ यशपाल गंगवार से काम पूरा होने की रिपोर्ट लगाते हुए द्वितीय किश्त की राशि दिलाने की मांग की। अमरजीत ने शिकायत की कि उक्त रिपोर्ट लगाने के एवज में वीपीडीओ ने पांच हजार रुपए रिश्वत मांगी। उक्त शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस की टीम ने 20 अक्तूबर 2010 को खटीमा-पीलीभीत रोड पर एक दुकान के आगे वीपीडीओ यशपाल को पांच हजार रुपए रिश्वत लेते धर दबोचा।
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान विभागीय अधिवक्ता ने न्यायालय में पांच गवाह पेश किए जबकि आरोपी के अधिवक्ता की ओर से चार गवाह पेश किए गए। मामले को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण/प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने आरोपी वीपीडीओ को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत धारा 13 के तहत सात वर्ष का साधारण कारावास और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सनाई है।
जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा और भुगतनी होगी।