खबरें वही थीं, तस्वीरें भी वही थीं, लेकिन बच्चों की नजर ने उन्हें एक नया अंदाज दे दिया। किस खबर को प्रमुखता मिले, कौन सी तस्वीर कहां सजे और पन्ने की सजावट कैसी हो...हर फैसला बच्चों ने खुद लिया। अमर उजाला की ‘अपना अखबार खुद बनाएं’ प्रतियोगिता में बच्चों ने खबरों की समझ, तस्वीरों की परख और पेज सज्जा के हुनर से अपनी रचनात्मक सोच और संपादकीय समझ का परिचय दिया।
प्रतियोगिता में आदित्य जोशी ने सबसे उत्कृष्ट अखबार बनाकर पहला स्थान पाया। उन्हें पुरस्कार के रूप 11 हजार का चेक, मेडल और प्रमाणपत्र दिया गया। द्वितीय पुरस्कार विजेता वंशिका को 7,100 और तृतीय स्थान पर रहीं वैष्णवी को 5,100 रुपये का चेक मिला। इनके अलावा सात बच्चों को सांत्वना पुरस्कार के साथ 150 प्रतियोगियों को मेडल व सर्टिफिकेट दिए गए। मंगलवार को इंस्प्रेशन स्कूल में आयोजित सम्मान समारोह में प्रतियोगिता के विजेताओं को मुख्य अतिथि जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने पुरस्कृत किया।
प्रतियोगिता मई-जून के ग्रीष्मावकाश में आयोजित की गई थी। इसमें शहर के 50 विद्यालयों के 13000 बच्चों ने प्रतिभाग किया। स्कूलों की छुट्टी के दौरान बच्चों ने अपनी रचनात्मक सोच और संपादकीय समझ का परिचय दिया। उनके बनाए अखबारों में सिर्फ खबरें नहीं थीं, बल्कि अपनी नजर से दुनिया को देखने और उसे पन्नों पर उतारने का हुनर भी नजर आया। वरिष्ठ पत्रकारों के निर्णायक मंडल ने हर स्कूल की तीन आकर्षक प्रविष्टियों का चयन किया। उसके बाद उनमें 10 चयनित की गईं। आखिरी राउंड में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार के लिए अखबार का चयन किया गया।
कुलपति प्रो.कश्यप ने बच्चों की रचनात्मकता की खूब प्रशंसा की। कहा कि अमर उजाला ने बच्चों के बीच अखबार बनाने की जो मुहिम शुरू की है, वह वाकई काबिले तारीफ है। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ लोक गायिका वीना तिवारी ने कहा कि बच्चों ने अखबार में पहाड़ की संस्कृति को बहुत सुंदर उकेरा है। ऐसी प्रतियोगिताएं बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ती हैं। फाइन आर्ट की विशेषज्ञ कुसुम पांडे ने कहा कि शब्दों की ताकत अखबार सिखाता है। आज के विजेता बच्चे कल के बड़े लेखक और पत्रकार बनेंगे। इंस्प्रेशन स्कूल के प्रबंधक दीपक बल्यूटिया ने कहा कि बच्चों की सोच को पंख देने का बेहतरीन मंच है अमर उजाला का यह अभियान। हम हर साल इसका हिस्सा बनेंगे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि और अन्य अतिथियों ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस्प्रेशन स्कूल की चेयरपर्सन गीतिका बल्यूटिया ने कहा कि बच्चों ने अपनी कल्पना और समसामयिक मुद्दों को जिस खूबसूरती से पन्नों पर उतारा, वह अद्भुत है। सेंट लॉरेंस सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रबंध निदेशक सुनील जोशी, प्रधानाचार्या अनिता जोशी, ऑस्टिन पब्लिक स्कूल के निदेशक धीरेंद्र मेहता, प्रधानाचार्य प्रकाश देव, इंस्प्रेशन स्कूल के प्रधानाचार्य अनुराग माथुर को मुख्य अतिथि प्रो. कश्यप ने सम्मानित किया।
कार्यक्रम का संचालन शिक्षक डॉ. प्रदीप उपाध्याय ने किया। अंत में अमर उजाला की ओर से अतिथियों को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के मॉस मीडिया के असिस्टेंट प्रोफेसर रामसुंदर शर्मा के नेतृत्व में अपूर्व कमल और रिमझिम गांधी ने प्रतिभागियों और अतिथियों से इस कार्यक्रम के संबंध में बातचीत की। कार्यक्रम में भाष्कर तिवारी, दीपक नौगाई, संजय गोस्वामी, मुकेश कुमार, नरेंद्र चुफाल, मोहित पंत, नितिन उपाध्याय, प्रीति जोशी, अविनाश कुमार, बृजमोहन, यशोदा राय, पवन बोरा, हेमा पांडे, इंदिरा जोशी, रीता राठौर आदि उपस्थित रहे।
इन्हें मिला सम्मान
विद्या पुष्प एकेडमी के कक्षा आठ के छात्र आदित्य जोशी की प्रस्तुति सबसे उत्कृष्ट रही। उन्हें 11,000 का चेक दिया गया। द्वितीय विजेता द शिवालिक इंटरनेशनल स्कूल की कक्षा 10 की छात्रा वंशिका कुमयां को 7,100 और तृतीय पुरस्कार स्कालर्स एकेडमिक होम स्कूल की कक्षा 9 की छात्रा वैष्णवी बगड़वाल को 5,100 रुपये का चेक मिला। इनके अलावा सात बच्चों को सांत्वना पुरस्कार मिला। उन्हें मेडल, प्रमाणपत्र दिए गए। साथ ही सभी प्रतिभागी विद्यालयों के सर्वश्रेष्ठ तीन विजेताओं को मेडल और प्रमाणपत्र देकर अतिथियों ने सम्मानित किया। इस दौरान सभी विजेता बच्चों के माता-पिता और अभिभावक मौजूद रहे।
टॉप-10 नन्हे संपादक बोले-
अखबार बनाना सबसे हिट एक्सपीरियंस
हल्द्वानी। अमर उजाला की स्कूल कनेक्ट ''''''''अपना अखबार खुद बनाएं'''''''' प्रतियोगिता के टॉप-10 विजेताओं के चेहरे पर जीत से ज्यादा कुछ कर दिखाने की चमक थी। सभी ने अपने अंदाज में अनुभव साझा किया।
पहली बार लगा कि मैं भी रिपोर्टर हूं। रात भर जागकर पेज सजाए, अब समझ आया अखबार बनाना कितनी मेहनत का काम है। -आदित्य जोशी, प्रथम पुरस्कार विजेता, विद्या पुष्प एकेडमी, हल्द्वानी
मम्मी कहती थीं मोबाइल छोड़ो। जब मैंने खुद का अखबार बनाया तो मम्मी ने ही सबसे पहले उसकी फोटो स्टेटस पर लगाई। -वंशिका कुमयां, द शिवालिक इंटरनेशनल स्कूल, हल्द्वानी।
मैंने अपने अखबार का नाम भी रखा था। अखबार बनाने का अनुभव बेहतरीन रहा। तब से रोज सुबह गेट से अखबार मैं ही लाती हूं। -वैष्णवी बगडवाल, स्कालर्स एकेडमिक होम स्कूल, हल्द्वानी।
खेल पेज बनाना सबसे ज्यादा मजेदार लगा। अब पता चला कि एक खबर के पीछे कितनी रिसर्च होती है। - अश्विन सैनी, इंस्प्रेशन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हल्द्वानी।
मुझे नहीं लगता था मैं टॉप-10 में आऊंगा। अखबार ने सिखाया कि रोज पढ़ोगे तभी लिख पाओगे। -अबूशहमा सिद्दीकी, एचएन इंटर कॉलेज हल्द्वानी।
मैंने विज्ञान और पर्यावरण पर फोकस किया। अखबार से मेरा जनरल नॉलेज बहुत बढ़ गया है। -संभव चौहान, -सिंथिया सीनियर सेकेंडरी इंटरेशनल स्कूल हल्द्वानी।
कार्टून और पहेलियां बनाते हुए बहुत मजा आया। अखबार सिर्फ खबर नहीं, ज्ञान का पिटारा है। - पीयूष पांडेय, विज्डम पब्लिक स्कूल, हल्द्वानी
पापा रोज कहते थे अखबार पढ़ो, मैं टाल देता था। अब खुद बनाया तो रोज पढ़ने की आदत बन गई है। -श्रद्धा गोस्वामी, वेंडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गौलापार, हल्द्वानी।
अपने हाथ से हेडिंग लिखते और फोटो चिपकाते समय अलग ही अनुभव फील हुआ, ऐसा लगा जैसे सच में प्रेस में हूं। -हृदयांशी शर्मा, शैमफोर्ड स्कूल, हल्द्वानी
दोस्त कहते थे अखबार बोरिंग होता है। मैंने उन्हें अपना बनाया हुआ अखबार दिखाया तो सबने तारीफ की। - वर्णिका, बीएलएम एडेकमी, हल्द्वानी।
जब सारा शहर सोता है, तब अखबार जगता है : प्रो. कश्यप
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के कुलपति प्रो. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने कहा कि जब रात में पूरा शहर सोता है, तब अखबार जागता है। सुबह दरवाजे पर दुनिया भर की ताजा जानकारी लेकर पहुंचता है। एक दिन अखबार न आए तो पूरा दिन सूना लगता है। अखबार विज्ञान, कला, साहित्य, संस्कृति, राजनीति, खेल सभी का ज्ञान देता है। यही माध्यम व्यक्ति का सर्वांगीण विकास कर बेहतर समाज बनाता है। इसलिए अखबार रोज पढ़ना चाहिए। इसे दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।