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छात्रवृत्ति घोटाले ने यशपाल आर्य को उलझाया 

Tue, 01 Aug 2017 03:06 AM IST
सुधाकर भट्ट 
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यशपाल आर्या
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समाज कल्याण की छात्रवृत्ति और पेंशन मामलों की जांच का मामला समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य की गले की फांस बन गया है। बताया जा रहा है कि सत्ताधारी दल के कुछ नेता इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय पर भी दबाव बनाए हुए हैं।
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खुद मुख्यमंत्री इस कई करोड़ के घोटाले के जांच विशेष जांच दल (एसआइटी) से कराने और तीन महीने में रिपोर्ट देने का आदेश जारी कर चुके हैं। हाल यह है कि 23 मई के इस आदेश के बाद अभी तक जांच दल गठित नहीं हुआ है और फाइल गृह विभाग में धूल फांक रही है। गृह मंत्रालय भी मुख्यमंत्री के पास ही है।

150 करोड़ रुपये से अधिक के छात्रवृत्ति घोटाले का मामला कांग्रेस कार्यकाल के समय सामने आया था। उस समय सतर्कता से हुई जांच में घोटाले की पुष्टि भी हुई थी। यह पाया गया था कि समाज कल्याण में अन्य राज्यों में पढ़ रहे छात्रों को छात्रवृत्ति देना दिखाया भर गया।
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इसके बाद अपर सचिव वी षणमुगम को यह जांच सौंपी गई। प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद यह जांच रोक दी गई थी। बाद में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने इस मामले की जांच विशेष जांच दल से कराने का आदेश देते हुए तीन महीने में रिपोर्ट मांगी। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी गृह विभाग इस फाइल पर कुंडली मारे बैठा है।

यह तब है जबकि गृह विभाग भी मुख्यमंत्री के पास ही है। सूत्रों के मुताबिक सत्ताधारी के कुछ नेता इस मामले की जांच विशेष जांच दल से न कराने के लिए दबाव बनाए हुए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि कांग्र्रेेस के ही दो नेताओं ने इस मामले की विभागीय जांच कराने की मांग की है। मुख्यमंत्री कार्यालय पर ही पड़ रहे इस दबाव का नतीजा है कि जांच फिलहाल ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है।

इस स्थिति में भाजपा में नए-नए आए समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य को भी बुरी तरह से उलझा दिया है। सूत्रों के मुताबिक आर्य खुद दो बार मुख्यमंत्री से इस मामले की जांच को आगे बढ़ाने को कह भी चुके है।

विभागीय मंत्री होने के नाते छात्रवृत्ति घोटाले और जांच को लेकर सवाल यशपाल आर्य से ही पूछे जा रहे हैं। आर्य हैं कि उनसे जवाब देते बन नहीं रहा है। सोमवार को भी मीडिया से मुखातिब आर्य केवल यही कह पाए कि जांच समय से होगी।
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