फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भूमका गांव से एससी परिवारों का पलायन

Tue, 24 Nov 2015 12:35 AM IST
चंद्रेश पांडे /अमर उजाला, हल्द्वानी (नैनीताल)।
विज्ञापन
विज्ञापन
पहाड़ के सुदूरवर्ती गांवों से पलायन को रोकने के लिए सरकार भले ही कितने ही दावे क्यों न कर ले लेकिन जमीनी हकीकत इससे एकदम इतर है। बीते तीन साल के भीतर भूमका गांव में रह रहे अनुसूचित जाति के दर्जन भर से अधिक परिवार रोजी रोटी की तलाश और मूलभूत सुविधाओं की चाह में गांव से पलायन कर तराई भाबर की ओर आ गए।
विज्ञापन


गांव से पलायन कर चुके उक्त परिवार साल में इक्का दुक्का बार ही अपने पैतृक गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। मूलभूत सुविधाएं न होने के कारण गांव से पलायन का यह सिलसिला अभी भी जारी है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब गांव वीरान हो जाएगा।

नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लाक में स्थित भूमका अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव है। गांव में सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी सुविधाओं का घोर अभाव है। प्राथमिक स्तर की शिक्षा तो गांव में उपलब्ध है, लेकिन हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त करने के लिए गांव के नौनिहालों को 7 से 15 किलोमीटर दूर का सफर पैदल ही तय करना होता है, वह भी जंगल के रास्तों से होकर।
विज्ञापन


उच्च शिक्षा यहां किसी सपने से कम नहीं। आठवीं कक्षा पास करने के बाद गिने चुने बच्चे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट तक पहुंचते हैं। जबकि अधिकांश छात्राएं हाईस्कूल से आगे नहीं पढ़ पाती हैं। इलाज की गांव में कोई सुविधा नहीं है। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को पांच किलोमीटर पैदल चारपाई पर रख रोड हेड (नाई) तक पहुंचाया जाता है और वहां से बेहतर इलाज की उम्मीद में मरीजों को लगभग 150 किलोमीटर दूर हल्द्वानी ले जाना ग्रामीणों की मजबूरी।

यही वह कारण हैं जिनके चलते ग्रामीण गांव से पलायन को मजबूर हो रहे हैं। गांव के सेवानिवृत्त शिक्षक और समाजसेवी दीवानी राम बताते हैं कि बीते तीन साल के भीतर भूमका निवासी संतोष राम, दीवानी राम, शांति देवी, गणेश राम, कृष्ण राम, प्रकाश चंद्र, तेज राम, पनीराम, कुंवर राम और यशपाल समेत कई परिवार गांव से पलायन कर गए हैं। दीवानी राम बताते हैं कि अधिकांश परिवार रोजगार की उम्मीद में हल्द्वानी, गौलापार और चोरगलिया में जा बसें हैं।

वर्तमान में भूमका में लगभग 250 परिवार शेष रह गए हैं जिनमें से चार सवर्ण परिवारों के अलावा सभी अनुसूचित जाति के हैं। ग्राम प्रधान शांति देवी कहती हैं कि पलायन रोकने के लिए गांव में मूलभूत सुविधाओं का होना जरूरी है। यदि गांव को मुख्य रोड से जोड़ दिया जाए तो भी कई समस्याएं खुद ही हल हो जाएंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें