सरोवर नगरी में वाहनों के दबाव को कम करने के लिए जिला प्रशासन ने इस बार यहां आने वाले बड़े वाहनों को रूसी बाईपास में ही खड़े करने की व्यवस्था की है लेकिन यहां सैलानियों और वाहन चालकों को मूलभूत सुविधाएं भी नसीब नहीं हो रही है। पर्यटकों को न तो पीने के लिए पर्याप्त और शुद्ध पानी ही मिल रहा है और न ही साफ सुधरे शौचालय। अस्थायी शौचालय गंदगी से पटे हैं जिसके चलते सैलानियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बताते चलें कि नैनीताल आने वाले पर्यटकों के बड़े वाहन रूसी में खड़े हैं। प्रशासन ने यहां अस्थायी शौचालयों और पानी की व्यवस्था तो की है लेकिन शौचालय गंदगी से पटे हैं और पानी भी पर्यटकों को नहीं मिल रहा है। पानी की तलाश में सैलानियों को एक से डेढ़ किलोमीटर तक पैदल यात्रा करनी पड़ रही है। मंगलवार को रूसी बाईपास में उतरी महिला पर्यटकों का कहना था कि नैनीताल से आठ किलोमीटर दूर उनकी गाड़ी को रोकने की व्यवस्था की है तो मूलभूत सुविधाएं भी जुटानी चाहिए थीं। यही नहीं बाईपास में सफाई की भी कोई व्यवस्था न होने के कारण जगह जगह कूड़ा कचरा नजर आ रहा है। पर्यटकों ने बताया कि बाईपास से नैनीताल आने जाने के लिए शटल सेवा लगाई गई है।
इस शटल सेवा में उन्हें 50 रुपये प्रति सवारी के हिसाब से किराया तो देना पड़ रहा है साथ में सामान का किराया उनसे अतिरिक्त लिया जा रहा है। विभिन्न शहरों से पहुंचे वाहन चालकों ने भी मूलभूत सुविधाएं न होने पर रोष जताया। अमरोहा से आए नितेंद्र सिंह, राही और सतीश कुमार, मुरादाबाद की रामवती, कश्मीरी, प्रियंका, विवेक शर्मा, गीता शर्मा, पूजा शर्मा, रोहित यादव, सोनू आदि का कहना है कि यदि नैनीताल का प्रशासन पर्यटन को बढ़ावा देना चाहता है तो पहले सैलानियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए। इधर बेलुवाखान के प्रधान और ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष हिमांशु पांडे ने भी रूसी बाईपास में मूलभूत सुविधाएं जुटाने की मांग की है।