नैनीताल में क्षतिग्रस्त रूसी बाइपास पुल
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नैनीताल। सोमवार को हुई बरसात के चलते रूसी बाईपास में करोड़ों की लागत से निर्माणाधीन सड़क का एक बड़ा हिस्सा दरक कर सौलिया गधेरे में समा गया। इससे जहां एक ओर लोनिवि द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता की कलई खुलकर सामने आ गई हैं, वहीं भूस्खलन के बाद बाईपास में रूसी से सरिताताल को वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने घटिया निर्माण कार्य को लेकर रोष जताया है। भूस्खलन से पुल को भी खतरा पैदा हो गया है।
बताते चलें कि लोनिवि ने करोड़ों रुपये की लागत से रूसी बाईपास पर निर्माण कराया जा रहा है। नैनीताल में वाहनों के बढ़ते दबाव को देखते हुए ही इस बाईपास को शासन से मंजूरी मिली थी। बाईपास को बेहतर बनाने के लिए कार्यदायी संस्था ने सड़क में पड़ने वाले दो गधेरों पर बड़े पुल भी बनाए हैं। रूसी की ओर जाने वाली रोड में पड़ने वाले पहले पुल से सटाकर कार्यदायी संस्था ने गधेरे से भूकटाव को रोकने के लिए आरसीसी की दीवार खड़ी की थी। बताया जाता है कि सोमवार को हुई बरसात में एकाएक आरसीसी की दीवार और सड़क का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गधेरे में समा गया।
भूस्खलन की सूचना पर ग्वल सेना के संस्थापक पूरन मेहरा, रूसची के ग्राम प्रधान हिमांशु पांडे, पान सिंह खनी, राज्य आंदोलनकारी पान सिंह और किशन गिरी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे। सड़क के बड़े हिस्से के दरकने के कारण बाईपास में वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। ग्वल सेना के संस्थापक पूरन मेहरा और ग्राम प्रधान हिमांशु पांडे ने आरोप लगाया है कि कार्यदायी संस्था और ठेकेदार द्वारा बाईपास निर्माण में गुणवत्ता पर जरा भी ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटिया निर्माणकार्य की पोल पहली बरसात में ही खुलकर सामने आ गई है। उन्होंने निर्माण कार्य की जांच कराने की भी मांग की है।