हल्द्वानी। काठगोदाम डिपो में सहायक महाप्रबंधक के खिलाफ रोडवेज के एक कर्मचारी संगठन ने धरना दिया तो इसके विरोध में चार कर्मचारी यूनियनें खुलकर सामने आ गई हैं। बुधवार को पहले रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद से जुड़े कर्मचारियों ने काठगोदाम डिपो में धरना दिया तो दोपहर बाद उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन, उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन, उत्तरांचल परिवहन मजदूर संघ और एससीएसटी श्रमिक संघ से जुड़े कर्मियों ने आरएम को ज्ञापन भेजा है।
परिषद से जुड़े कर्मचारी सुबह डिपो परिसर में पहुंचे और धरना दिया। उन्होंने एआरएम पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि एआरएम पक्षपात कर काम कर रहे हैं। धरना देने वालों में उमेश जोशी, श्याम सिंह शाही, जगमोहन, शंकर सिंह, आनंद बल्लभ, मनोज मनराल, चंद्रशेखर, अतुल शुक्ला, नवीन बिष्ट, पूजा, विजय चौहान आदि शामिल रहे। वहीं एआरएम के समर्थन में रोडवेज की चार यूनियनें आ गईं। उन्होंने आरएम को ज्ञापन भेज चेताया कि यदि किसी दबाव में एआरएम का तबादला किया गया तो चारों यूनियनों से जुड़े कर्मचारी आंदोलन को बाध्य होंगे। यहां रोडवेज कर्मचारी यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष आनंद बिष्ट, इंप्लाइज यूनियन के क्षेत्रीय मंत्री अजय शर्मा, परिवहन मजदूर संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष ललित पांडे, एससीएसटी श्रमिक संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन राम आदि मौजूद रहे।
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विवाद की वजह
रोडवेज सूत्रों के अनुसार बीती सात जुलाई को एआरएम ने हिसार रूट पर चलने वाली पुरानी बस को मार्ग से हटा दिया था। इससे परिषद के पदाधिकारी नाराज हो गए। एआरएम ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि उन पर नियमों के विपरीत काम करने का दबाव बनाया गया।
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22 रोडवेज बसों के पहिए थमे
काठगोदाम डिपो में रोडवेज कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन से बस सेवाओं पर असर पड़ा। बुधवार को डिपो की 40 के इतर 18 ही बसों का संचालन हुआ। नैनीताल रूट पर रोजाना 10 बसों का संचालन होता है जो चार तक पहुंच गया। इसी तरह टनकपुर रूट की सेवा भी बाधित हुई। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।