आपदा एवं सिंचाई मंत्री यशपाल आर्या के घर के आगे का रकसिया नाला कूड़ाघर में बदल गया है। आसपास के लोग ही नहीं खुद सिंचाई मंत्री के घर का कूड़ा भी इस नाले में गिरता है। कूड़े से नाला पट गया है, जो बरसात में आपदा लेकर आता है।
आसपास के लोगों के लिए पालीथिन सबसे बड़ी आपदा है। नाले की गंदगी और बहकर आने वाली पालीथिन लोगों के खेत-खलियान तक पहुंचती है। खेतों में पालीथिन के ढेर लगे हैं, जिससे कई एकड़ उपजाऊ भूमि बर्बाद हो चुकी है। बावजूद इसके लोग नाले में कूड़ा और पालीथिन फेंकना बंद नहीं कर रहे हैं।
दमुवाढूंगा से लालडांठ होते हुए बिड़ला स्कूल और फिर टांडा जंगल तक जाने वाला रकसिया नाला हर बरसात में मुसीबत लेकर आता है। इसके लिए लोग खुद ही जिम्मेदार हैं। गर्मियों में नाला सूखने पर लोग इसे कूड़ाघर के रूप में इस्तेमाल करते हैं। घर का कूड़ा ही नहीं बल्कि पालीथिन भी फेंकते हैं। दमुवाढूंगा से लेकर बिड़ला स्कूल तक का नाला आजकल कूड़ाघर में बदल गया है।
आसपास के होटल-रस्टोरेंट, बैंकेट हालों की गंदगी, मवेशियों का गोबर, घरों का सीवर, अस्पतालों का बायोमेडिकल और गांवों से उठने वाला कूड़ा भी इसी नाले में समाता है। सिंचाई मंत्री के घर का कूड़ा भी इसी नाले में गिर रहा है। सिंचाई मंत्री के घर के प्रवेश द्वार की पुलिया के नीचे ही कूड़े के ढेर लगा है।
हल्द्वानी के सबसे अधिक वीआईपी इसी क्षेत्र में रहते हैं। एक प्राइवेट संस्था की मदद से गांव से कूड़ा उठाने की व्यवस्था है, जिसके एवज में हर परिवार से 50 रुपए लिए जाते हैं, लेकिन वीआईपी 50 रुपए देने के बजाए नहर में कूड़ा फेंकते हैं, जिसकी देखादेखी दूसरे लोग भी कूड़ा नहर में डाल देते हैं। कई जगहों पर तो नहर ही खोद डाली है। नहर से पत्थर और मिट्टी निकालने से कई जगहों पर नाले की सुरक्षा दीवार को खतरा हो गया है। - दीपा शर्मा, ग्राम प्रधान, छड़ायल सुयाल