हल्द्वानी। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। तापमान में उतार-चढ़ाव, बारिश और उमस के बीच शरीर को वातावरण के अनुसार ढलने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार संक्रमण के संपर्क में आने और शरीर में इंफ्लेमेशन (सूजन संबंधी प्रतिक्रिया) बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर खासकर उन लोगों में अधिक दिखाई देता है जिनकी प्रतिरक्षा क्षमता पहले से कमजोर है। बेस अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में मरीजों की संख्या करीब 250 प्रतिदिन पहुंच गई है। डॉ. सुशीला तिवारी चिकित्सालय (एसटीएच) की मेडिसिन ओपीडी में भी 320 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं।
बेस अस्पताल के पीएमएस डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने बताया इंफ्लेमेशन शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है। जब शरीर में वायरस, बैक्टीरिया या किसी तरह की चोट से खतरा होता है तो प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय होकर प्रभावित हिस्से की रक्षा करता है। इस दौरान सूजन, गर्माहट, दर्द या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
नमी से कान-नाक-गले की दिक्कतें शुरू
हल्द्वानी। बरसात के मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव, वातावरण में बढ़ी नमी और वायरल व फंगल संक्रमण के कारण कान, नाक व गले से संबंधित मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सुशीला तिवारी अस्पताल की ईएनटी ओपीडी में इन दिनों रोजाना करीब 180 से 200 मरीज उपचार और परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं।
ईएनटी विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. अचिन पंत ने बताया कि नमी और तापमान में अचानक बदलाव से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों तथा एलर्जी, अस्थमा या साइनस की समस्या से पहले से पीड़ित लोगों को बरसात में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अत्यधिक ठंडे पेय और बर्फ के अनावश्यक सेवन से बचने , धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह परहेज करने के लिए कहा गया है।