महिला अस्पताल में चार माह में हुए 600 सामान्य प्रसव
अप्रैल से जुलाई के बीच महिला अस्पताल में 864 प्रसव हुए। इनमें 600 सामान्य और 264 सीजेरियन रहे। जून में सबसे ज्यादा 229 प्रसव हुए जबकि अप्रैल में 206 प्रसव दर्ज किए गए। मई में 208 और जुलाई में 221 प्रसव हुए। यानी चार महीनों में करीब 69 प्रतिशत प्रसव सामान्य रहे। अस्पताल की ओपीडी भी लगातार अधिक रही। अप्रैल में 6,130, मई में 7,006, जून में 7,515 और जुलाई में 7,063 मरीज पहुंचे। चार महीनों में कुल ओपीडी 27,714 रही जिनमें 32,974 पैथोलॉजी जांच और 3,687 अल्ट्रासाउंड हुए। जुलाई में सबसे ज्यादा 9,967 पैथोलॉजी जांच और 977 अल्ट्रासाउंड दर्ज किए गए।
गायनी के आठ में छह पद खाली
महिला अस्पताल में मरीजों के दबाव के बीच विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी चिंताजनक है। गायनी के आठ में छह, बाल रोग के चार में तीन और एनेस्थीसिया के चार में दो पद खाली हैं।
-डॉ. कांता किरन, प्रभारी महिला अस्पताल
कैंसर संस्थान में भी विशेषज्ञों की कमी
कुमाऊं के कैंसर संस्थान को स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में विकसित करने की तैयारी है, लेकिन यहां सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और हेमेटो-ऑन्कोलॉजिस्ट की कमी है। कैंसर उपचार में इन तीनों की भूमिका अहम है। सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट ऑपरेशन, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट कीमोथेरेपी व अन्य दवा आधारित उपचार और हेमेटो-ऑन्कोलॉजिस्ट ब्लड कैंसर के उपचार में विशेषज्ञ होता है। कई मरीजों को सर्जरी, कीमोथेरेपी और अन्य उपचार की जरूरत एक साथ पड़ती है। ऐसे में विशेषज्ञों की टीम का एक ही संस्थान में उपलब्ध होना जरूरी है।
सरकार की ओर से सुपर स्पेशलिस्ट का कैडर बनाया जा रहा है। जल्द इंटरव्यू होने वाले हैं और पूरी संभावना है कि संस्थान को तीन स्पेशलिस्ट मिल जाएंगे।
-प्रो. डॉ. केसी पांडे, निदेशक कैंसर संस्थान
बेस अस्पताल में डायलिसिस की नई व्यवस्था शुरू
हल्द्वानी।
बेस अस्पताल में डायलिसिस की नई व्यवस्था शुरू हो गई है। अभी तक यहां पीपीपी मोड पर हैदराबाद की कंपनी नेफ्रोकेयर हेल्थ सर्विस मरीजों की डायलिसिस कर रही थी। मंगलवार शाम से यह चार्ज अब बंगाल की कंपनी संजीवनी को सौंप दी गई है। नेफ्रोकेयर हेल्थ सर्विस ने 2017 से मरीजों की डायलिसिस शुरू की थी। 10 साल बाद अब नई कंपनी के तकनीशियनों ने कार्य संभाल लिया है। यहां करीब 240 मरीज पंजीकृत हैं। मंगलवार को 70 मरीजों की डायलिसिस हुई। यहां 28 डायलिसिस मशीनें हैं। प्रबंधक महेंद्र बिष्ट बताया कि नेफ्रोकेयर कंपनी ने मशीनें सरकार को हैंडओवर कर दी हैं। अब नई कंपनी व्यवस्था संभालेगी। संवाद