हल्द्वानी। संसाधन जुटाने में सिस्टम की सांसें फूलने से टीबी और श्वांस रोग विभाग का 60 बेड का नया भवन शोपीस बना हुआ है। परिसर में 30 बेड के पुराने भवन में ही मरीजों का इलाज हो रहा है। मरीजों का दबाव बढ़ने और ऑक्सीजन की जरूरत पर उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल भेजा जा रहा है। परेशानी की जड़ विभाग में ऑक्सीजन प्लांट का न होना है, जो कि मरीजों के लिए सबसे जरूरी है। इसीलिए नई बिल्डिंग में मरीज भर्ती नहीं हो पा रहे हैं।
रामपुर रोड स्थित एचएन स्कूल के पास मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत टीबी और श्वांस रोग विभाग का पांच मंजिल भवन बनाया गया। 60 बेड के नए भवन में 10 बेड का आईसीयू भी है। ग्राउंड फ्लोर में टीबी और श्वांस रोगियों की ओपीडी काफी पहले शुरू हो गई थी। पिछले साल कहा गया था कि यहां आईपीडी भी जल्द शुरू हो जाएगी। तब से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। पुराने भवन में 30 मरीजों को भर्ती कर सकते हैं। इसमें 11 बेड मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) मरीजों के लिए और 19 बेड साधारण टीबी मरीजों के लिए हैं। साधारण मरीजों को जब ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है, तो उन्हें एसटीएच भेजा जाता है।
खतरे की आशंका पर भवन के बाहर प्लांट लगाने की तैयारी
नए भवन के बेसमेंट में ही ऑक्सीजन प्लांट के लिए जगह बनाई गई थी। आग लगने और मरीजों को खतरा होने की आशंका पर अब भवन के बाहर ऑक्सीजन प्लांट लगाने की बात कही जा रही है। नए भवन में जांच के नाम पर दो मशीनें लगी हैं। यहां मरीजों को एक्स-रे जांच और पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट सुविधा मिल पा रही है।
वर्जन
ऑक्सीजन प्लांट न होने से आईपीडी शुरू नहीं हो सकी है। ऑक्सीजन के लिए 20 हजार लीटर क्षमता के लिक्विड ऑक्सीजन कैप्सूल के लिए टेंडर किया गया है। नए भवन में ड्रग वितरण केंद्र और रजिस्ट्रेशन काउंटर भी बन रहा है। यह सब प्रक्रिया पूरी होने के बाद यहां मरीजों को भर्ती करना संभव हो पाएगा।
डॉ. आरजी नौटियाल, विभागाध्यक्ष, टीबी और श्वांस रोग विभाग
विभागाध्यक्ष के अलावा वह स्वयं भी टीबी विभाग में जल्द आईपीडी शुरू करने के प्रयास में लगे हुए हैं। ऑक्सीजन प्लांट के लिए शासन को पत्र भेजा गया है, विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं। जैसे ही व्यवस्था बनेगी मरीजों को नए भवन में भर्ती किया जाएगा।
डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज