शासन स्तर पर केएमवीएन के प्रबंध निदेशक धीराज सिंह गर्ब्याल की अध्यक्षता में नैनीताल महायोजना के तहत जोन-एक और जोन-दो में निर्मित भवनों के चिह्नीकरण के लिए गठित समिति की गुरुवार को बैठक हुई। बैठक में बताया गया कि जोन एक और जोन दो में नैनीताल नगर का कौन-कौन सा क्षेत्र शामिल है।
जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (जीएसआई) के नक्शे से यह साफ नहीं हो रहा है। उन्होंने जीएसआई के नक्शे को साथ लेकर जोन एक और जोन दो क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और दोनों जोन में शामिल क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए।
सूखाताल स्थित पर्यटक आवास गृह में हुई बैठक में देहरादून से आए जीएसआई के वरिष्ठ भू वैज्ञानिक भूपेंद्र सिंह और सेवाव्रत दास ने जोन एक और जोन दो की पहचान के लिए जीएसआई की ओर से किए गए सर्वे के बारे में बताया।
एमडी गर्ब्याल ने कहा कि जीएसआई के नक्शे में यह साफ नहीं है कि नैनीताल का कौन सा क्षेत्र जोन एक और जोन दो में है। क्षेत्र की पहचान के लिए जरूरी है कि नए सिरे से सर्वे किया जाए। उन्होंने चरणबद्ध तरीके से मैपिंग कराने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि सरोवर नगरी में सात नंबर क्षेत्र, माल्डन कॉटेज, चार्टन लॉज, स्टाफ हाउस आदि क्षेत्र सुरक्षित जोन में शामिल नहीं है। इस क्षेत्र में पूर्व में कराए गए सर्वे में सैकड़ों खतरनाक भवनों को चिह्नित किया गया था।
बैठक में झील विकास प्राधिकरण के सचिव श्रीष कुमार, टाउन प्लानर गीता खुल्बे, परियोजना अधिकारी सीएम साह, जगदीश चंद्रा, एसके गर्ग, ईश्वर सिंह रौतेला, आनंद राम, एमपीएस कालाकोटी, केएन जोशी आदि मौजूद थे।