गौला के कई खनन गेटों में रेता, पत्थर आदि खत्म हो गया है, स्थिति यह है कि नदी के तल से मिट्टी तक निकल आयी है। अब बताया जा रहा है कि अगले सत्र के लिए गौला में खनन क्षेत्र का अध्ययन और लक्ष्य तय करने वाली संस्था ने वर्तमान लक्ष्य से दो गुना खनिज निकालने की संस्तुति की है। इसके बाद से जंगलात में भी खलबली है। अब नये सिरे से अध्ययन कराने की तैयारी की जा रही है।
वर्तमान में गौला में 54 लाख घनमीटर खनिज का लक्ष्य है। पिछले साल सेंट्रल स्वायल एंड वाटर कंजरवेशन रिसर्च ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (सीएसडब्लूसीआरटीआई) की टीम ने खनन इलाके का अध्ययन किया था, बताया जाता है कि सीएसडब्लूसीआरटीआई की दक्ष और विशेषज्ञों की टीम ने नदी में दो गुना तक (एक करोड़ घनमीटर से ज्यादा) खनिज पाया और अगले सत्र में उसको निकालने की संस्तुति कर दी है।
जबकि इस बार स्थिति यह है कि हल्दूचौड़, देवरामपुर जैसे गेटों पर पत्थर, रेता तक खत्म हो गए हैं। यहां पर जमीन से मिट्टी तक निकल आयी है। कई जगहों पर खनिज कम होने पर अवैध तरीके से प्रतिबंधित जगहों पर खनन कर रहे हैं। अब इस रिपोर्ट को लेकर जंगलात की अंदरखाने नींद उड़ी हुई है। अगर रिपोर्ट लागू होती है, तो मौजूदा स्थिति में पुराना लक्ष्य पूरा होना संभव नहीं होगा। दूसरा प्रतिबंधित इलाके में धड़ल्ले से खनन होने की आशंका है। ऐसे में नये सिरे से खनन क्षेत्र का अध्ययन कराने की तैयारी चल रही है।
डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते का कहना है कि दो गुना तक लक्ष्य निर्धारित करने की सूचना मिली है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को मौजूदा नदी की स्थिति से अवगत करा दिया गया है। जिला खनन समिति अध्यक्ष व डीएम दीपक रावत का कहना है कि अभी बरसात बाकी है। इसके बाद आवश्यकतानुसार अध्ययन करा कर लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा।