अपनों को फायदा पहुंचाने के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियम और कायदों को प्रयोग अपने हिसाब से किया। कृषि महाविद्यालय के एग्रोनामी विभाग में सहायक प्राध्यापक पद पर भर्ती के लिए मनमानी की गई।
विश्वविद्यालय ने अपनी ही पीएचडी को आउट आफ कोर्स बताते हुए आवेदनकर्ता का फार्म ही रिजेक्ट कर दिया। एग्रीकल्चर विभाग के डीन और वर्तमान कुलपति डा. जे कुमार ने फार्म ही निरस्त कर दिया।
पंतनगर विश्वविद्यालय में शुरू से ही पीएचडी कराई जा रही है। कृषि महाविद्यालय के एग्रोनामी विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर नियुक्ति होनी थी। विज्ञापन निकालकर प्रत्यावेदन मांगे गए थे। आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2015 थी।
सभी आवेदन उचित तरीके से 30 जुलाई तक भेजे जाने थे। नीता त्रिपाठी ने भी आवेदन किया था। उन्होंने यूपी बोर्ड से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया है, जबकि पंतनगर विश्वविद्यालय से बीएसी एग्रीकल्चर में और एग्रोनामी से एमएससी की पढ़ाई की।
त्रिपाठी ने एग्रोनामी विषय से 82.2 प्रतिशत नंबरों से पीएचडी पूरी की। नास रेटिंग के अनुसार त्रिपाठी के रिसर्च पेपर भी दो थे, जबकि विश्वविद्यालय ने एक पेपर दिखाया। सभी अर्हताएं पूर्ण होने के बावजूद एग्रीकल्चर विभाग के डीन और वर्तमान कुलपति डा. जे कुमार ने फार्म ही रिजेक्ट कर दिया।
उन्होंने फार्म रिजेक्ट करने के पीछे पीएचडी का आउट आफ कोर्स होना बताया। त्रिपाठी को साक्षात्कार में शामिल होने का मौका भी नहीं मिला। बड़े आश्चर्य की बात है कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने अपनी ही पीएचडी को आउट आफ कोर्स बता दिया।
सवाल ये उठता है कि पीएचडी अगर आउट आफ कोर्स है तो कराई ही क्यों जा रही है। अगर पीएचडी आउट आफ कोर्स है तो पंतनगर विश्वविद्यालय ने पीएचडी को मान्यता दिलाने के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किए। कहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने किसी को लाभ पहुंचाने के लिए तो पीएचडी को आउट आफ कोर्स नहीं दिखाया।
पंतनगर विश्वविद्यालय में कोई भी पीएचडी आउट आफ कोर्स नहीं है। चूक के कारण आउट आफ कोर्स लिख गया मगर नीता त्रिपाठी को नंबर पूरे दिए गए। त्रिपाठी नेट क्वालीफाइड नहीं थी।
एनके संड, सीपीओ, पंतनगर विश्वविद्यालय