हल्द्वानी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत महाविद्यालयों को समेकित (इंटीग्रेटेड) बीएड पाठ्यक्रम के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की ओर से इस संबंध में आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वर्ष 2027-28 सत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई है।
उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के महाविद्यालयों को पत्र भेजकर इस संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड में अभी तक केवल कोटद्वार स्थित संस्थान को ही समेकित शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम की सुविधा मिली है। नई व्यवस्था के अनुसार वर्ष 2030 के बाद ऐसे महाविद्यालय शिक्षक शिक्षा से जुड़े तकनीकी पाठ्यक्रम संचालित नहीं कर सकेंगे जिन्होंने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से समेकित बीएड के लिए मान्यता और पंजीकरण प्राप्त नहीं किया होगा।
बहुविषयक संस्थानों को ही आवेदन की अनुमति
परिषद से जारी मानकों के अनुसार केवल बहुविषयक संस्थानों को ही आवेदन की अनुमति दी गई है। आवेदन करने वाले संस्थानों को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की मान्यता, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग में स्थान तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यता जैसे मापदंड पूरे करने होंगे।
इन संस्थानों को मिलेगी प्राथमिकता
इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के श्रेणी एक का दर्जा प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थान, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद में बी प्लस या उससे अधिक ग्रेड वाले विश्वविद्यालय और महाविद्यालय, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग में निर्धारित स्थान प्राप्त संस्थान, केंद्रीय, राज्य, निजी एवं डीम्ड विश्वविद्यालय, स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विश्वविद्यालय।
कोट
राजकीय महाविद्यालयों में इंटीग्रेटेड बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए एनआईआरएफ और नैक रैंकिंग में सुधार अनिवार्य होगा। बिना रैंकिंग में सुधार के इंटीग्रेटेड बीएड कार्यक्रम नहीं चलाए जा सकेंगे। -गोविंद पाठक, उप निदेशक, उच्च शिक्षा