हाईकोर्ट ने सूचना आयुक्त के उस आदेश को सही ठहराया है। जिसमें विभिन्न विभागों से व्यक्ति विशेष से संबंधित सूचना मांगने को सूचना अधिकार का दुरुपयोग व ब्लैकमेलिंग मानते हुए सूचना मांगने वाले पर गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। न्यायालय ने सूचना मांगने वाले की याचिका को खारिज कर दिया।
उन्होंने डीएम देहरादून को आदेशित किया कि वह राज्य सूचना आयुक्त के आदेश के अनुरूप सूचना मांगने वाले के खिलाफ गुंडा एक्ट सहित संबंधित व्यक्ति के मन, ख्याति और उसकी संपत्ति को हानि पहुंचाने के अपराध के प्रयास, रंगदारी मांगने और सरकारी अधिकारियों के कार्य में बाधा डालने के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित करें।
न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार गुप्ता की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सुरेंद्र अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल की ओर से 13 अगस्त 2013 को पारित आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश के तहत सूचना आयुक्त ने कहा था कि याचिकाकर्ता की ओर से सुश्री गंगा जोशी, सुमन मचखोला व श्याम आर्या के खिलाफ चल अचल संपत्ति के क्रय विक्रय संबंधी व अन्य सूचनाएं मांगी गई थीं। प्रकरण में याचिकाकर्ता के खिलाफ शिकायत आई थी कि वह स्वयं को पत्रकार बताता है और पत्रकारिता की आड़ में सूचना के अधिकार का दुरुपयोग और ब्लैकमेलिंग करता है।
सुनवाई के बाद सूचना आयुक्त ने याचिकाकर्ता सुरेंद्र अग्रवाल को दोषी मानते हुए डीएम देहरादून को आदेश दिया था कि वह उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश गुंडा अधिनियम 1970 तथा आईपीसी की धारा 189, 186, 384, 506, 468, 471 के अंतर्गत कार्यवाही करें। इस आदेश को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सूचना आयोग की ओर से अधिवक्ता विपुल शर्मा ने जवाब में कहा कि याचिकाकर्ता इस प्रकार की कई सूचनाएं मांग कर लोगों को परेशान करता है, याचिकाकर्ता के खिलाफ अनेक व्यक्तियों व संगठनों ने आयोग से शिकायत की थी कि वह उन्हें परेशान तथा ब्लैकमेलिंग करता है। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अवतार सिंह रावत ने पैरवी की।