रानीबाग में जंगल के राजा समेत दूसरे वन्यजीवों का इलाज हो सकेगा। यह इलाज केवल काम चलाऊ तरीके से नहीं बल्कि आधुनिक तरीके से होगा। इसके लिए रानीबाग रेस्क्यू सेंटर में इमारत समेत दूसरे काम भी शुरू हो गये हैं।
कुमाऊं में बाघ समेत दूसरे वन्यजीवों को इलाज के लिए आमतौर पर नैनीताल चिड़ियाघर भेजा जाता है।
इसका दबाव कम करने और वन्यजीवों का बेहतर इलाज देने को रानीबाग में संसाधन, सुविधाओं से युक्त हास्पिटल बनाने की योजना बनी है। इसके तहत सेंटर में पैथालॉजी , एक्सरे से लेकर अल्ट्रासाउंड जैसी रेडियोलॉजी की शाखा भी विकसित होगी। जहां पर अंगों की जांच हो सकेगी।
इसके अलावा भविष्य में डीएनए सैंपल कलेक्शन से लेकर जांच की भी मंशा जंगलात ने बनाई है। इस काम में नैनीताल चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक, कर्मी मदद करेंगे। इसके अलावा हैदराबाद की लैबोरेटरी फार कंजरवेशन आफ इनडेंजर्ड एनिमल(लैंकस) भी सहायता करेगी।
इसके लिए प्रारंभिक बातचीत हो चुकी है। नैनीताल वन प्रभाग के मनोरा रेंज के आरओ मुकुल शर्मा कहते हैं कि इसके लिए भवन आदि का निर्माण कार्य शुरू किया गया है।
डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि कई बार तराई के इलाके से वन्यजीवों को इलाज के लिए चिड़ियाघर के पास भेजा जाता है। इसमें समय आदि ज्यादा लग जाता है। पर इसके बनने से काफी मदद हो सकेगी।