सीमा सुरक्षा बल की ओर से प्रयुक्त किए जाने वाले आकर्षक और मारक हथियारों की प्रदर्शनी, सीमाओं के दीदार के साथ गहन प्रशिक्षण को दर्शाते फोटोग्राफ की प्रदर्शनी, डाक्यूमेंट्री, प्रशिक्षित श्वान के कर्तब तथा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच सोमवार को सीमा सुरक्षा बल की स्वर्ण जयंती मनाई गई।
डीएसए मैदान में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर डीएम दीपक रावत ने कहा कि सीमा पर जब जवान जागता है तभी देशवासी चैन से सो पाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद उन्होंने धारचूला में तैनाती के दौरान राहत बचाव कार्यों में बीएसएफ के कार्यों को नजदीक से देखा जो सराहनीय थे।
इससे पूर्व नोडल अधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि 1 दिसंबर 1965 को बीएसएफ का गठन हुआ था। इस वर्ष बीएसएफ स्वर्ण जयंती मना रहा है। कार्यक्रम के तहत एसआई वीरपाल के नेतृत्व में 8 प्रशिक्षित श्वान ने ट्रेंड सोल्जर की तरह सावधान, विश्राम, कदमताल समेत किसी वस्तु को सूंघकर डिटेक्ट करना, बाधाओं को पार करने सरीखे कर्तब दिखाए गए। इसके अलावा हथियारों की प्रदर्शनी में 81एमएम मोर्टार, 9 एसएमजी, 9.5 ए राइफल, यूबीसीएल, इनसास, शार्प शूटर गन, राकेट लांचर, एंटी मटीरियल राइफल विध्वंसक, 30 एमएम आटो ग्रेनेट लांचिंग सिस्टम, 7.62 एमएम मीडियम मशीन गन आदि का प्रदर्शन किया गया था।
कार्यक्रम में लगाई गई फोटो गैलरी में सीमा की तस्वीरे थी तो प्रशिक्षण की बारीकियां भी। इस दौरान युवाओं को बीएसएफ के प्रति प्रेरित करने को लेकर बनाई गई डाक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। प्यारे सिंह के नेतृत्व में बीएसएफ बैंड की धुन भी खासा आकर्षण थी। देर सायं तक दर्शक कार्यक्रमों का लुत्फ उठाते रहे।बीएसएफ महानिदेशक आईपीएस देवेंद्र कुमार पाठक के मार्गनिर्देशन में हुए कार्यक्रम में असिस्टेंट कमांडेंट नवीन कुमार, आरबी मीना, हिंगलाज समेत 120 जवान व सैकड़ों दर्शक मौजूद थे।