रामपुर रोड पर एफटीआई गेट-2 के पास बेशकीमती जमीन फिर विवादों और सवालों में है। यहां पर बहुमंजिला इमारत निर्माणाधीन है। मामले में धोखाधड़ी का क्रिमनल केस दर्ज कराने के लिए एसीजीएम के यहां प्रार्थनापत्र दिया गया है।
रामपुर रोड की जमीन विवादों में रही थी। 2015-मार्च में प्रशासन ने लावारिस श्रेणी-1(ख) के तहत कब्जे में लेकर ग्राम प्रधान की सुपुर्दगी में दे दी थी। यह कार्रवाई तत्कालीन एसडीएम पंकज उपाध्याय ने डीएम दीपक रावत के निर्देश पर की थी। इस भूमि पर बाद में बहुमंजिला इमारत का निर्माण शुरू हो गया।
अब काफी काम पूरा भी हो गया है। अब इस मामले में आजाद नगर निवासी अब्दुल रऊफ ने एसीजीएम के यहां प्रार्थना पत्र देते हुए क्रिमिनल केस दर्ज कराने की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि इस भूमि का पट्टा जसीराम के नाम था, जो बाद में उनकी बेटी विशनी देवी को मिला।
विशनी देवी ने इस जमीन सौदा 1989 में उनसे किया था, जिसके बाद से जमीन पर अब्दुल रऊफ के परिवार का कब्जा चला आ रहा था। उनका आरोप है कि बाद में विशनी देवी ने राजनैतिक रसूखदार से जुड़े दबंगों के हाथ जमीन का सौदा कर दिया। बाद में जमीन से जुड़ी कई औपचारिकता भी पूरी कर दी गईं। इसमें प्रशासन ने कथित तौर पर रसूखदारों को फायदा पहुंचाया गया।
उनका कहना है कि विशनी देवी हरिजन हैं। विशनी देवी ने धर्म बदल लिया है, उनका नाम अब नसीम बानो है। आरोप है कि इन कागजी कार्रवाई के दौरान इन तथ्यों को छुपाया भी गया है। मामले में कई और अनियमितताएं हैं।
इस संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट को शिकायती पत्र भी दिया गया, इसके अलावा 29 सितंबर को अपने साथ हुई धोखाधड़ी की सूचना भी हल्द्वानी पुलिस और डीआईजी कुमाऊं को दे दी गई। मामले में एसडीएम एपी वाजपेयी का कहना है कि उनके संज्ञान में यह प्रकरण नहीं है।
न ही किसी व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई है। अगर को व्यक्ति प्रक्रिया से सहमति नहीं है, तो वह वैधानिक तौर पर शिकायत कर सकता है। उचित कार्रवाई होगी। वहीं निर्माण के दौरान वन भूमि दबाने की बात भी सामने आई थी। तराई केंद्रीय वन प्रभाग एसडीओ आरसी कांडपाल का कहना था कि इमारत निर्माण के दौरान कब्जा करने की कोशिश की गई थी, जिसे विफल कर दिया गया।
वन विभाग के सीमांकन पीलर के बाद ही इमारत का निर्माण किया जा रहा है। वहीं, विशनी देवी से रजिस्ट्री करने वालों में शामिल आनंद सिंह दरम्वाल का कहना है कि भूमि खरीद में सभी नियम और प्रक्रियाओं को पूरा किया गया है। हरिजन व्यक्ति से कोई सवर्ण व्यक्ति जमीन खरीद सकता है, यह प्रक्रिया इस मामले में भी पूरी की गई है। कोई भी अनियमितता और नियम विरुद्ध कार्य नहीं किया गया है।