रामनगर फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन की शुरुआत चार म्यूजिक वीडियो चल चलिए, सुरसुरी चाय, सम्पविला देह जरी, मंगलेश डबराल की कविता तानाशाह के फिल्मांकन से किया गया। उत्तराखंड के परिवेश पर बनीं फिल्म हंसा ने दर्शकों को बांधे रखा। इस फिल्म में दो ऐसे बच्चों की कहानी है जिनका पिता होटल में नौकरी करते हुए गायब हो जाते हैं।
फिल्म के बहाने निर्देशक मानव कॉल ने होटल संस्कृति के उत्तराखंड पर पड़ रहे दुष्परिणामों को बेहतरीन तरीके से फिल्मांकित किया है। फिल्म को नैनीताल जनपद के रामगढ़ ब्लाक में फिल्माया गया है। फिल्म के पश्चात इसके महत्वपूर्ण किरदार सुदर्शन जुयाल ने दर्शकों के सवालों का जवाब दिया।
दोपहर के सत्र में प्रतिरोध के सिनेमा के राष्ट्रीय संयोजक संजय जोशी ने दर्शकों से रूबरू होते हुए सिनेमा के सफरनामा तथा बदलते तकनीक के सम्बन्ध को नए सिनेमा के साथ जोड़ते हुए भारतीय समाज में विकास और विस्थापन की अवधारणा को समझाया।
उन्होंने नए सिनेमा की तकनीक के सस्ते होने और जन संघर्षों के साथ जुड़े होने के महत्व को आनंद पटवर्धन की दस्तावेजी फिल्म हमारा शहर, हाउ बम पवन कुमार की फिल्म आफ्सपा 1958 और सूर्य शंकरदास की लघु फिल्मों 15 मई 2010 और हुर्री अप के जरिये रेखांकित किया।
अंतिम सत्र में एक नए तरह के अस्पताल की कहानी कहती अजय टी जी की दस्तावेजी फिल्म पहली आवाज दिखाई गई। यह फिल्म छतीसगढ़ में मजदूर नेता शंकर गुहा नियोगी द्वारा शुरू किये गए अनूठे अस्पताल के बारे में विस्तार से बताती है जो आज के समय में एक मिसाल है। फेस्टिवल की अंतिम फिल्म गर्म हवा थी। एमएस सथ्यू निर्देशित विभाजन की कहानी कहती इस फिल्म को दर्शकों को गहरे तक प्रभावित किया।
समारोह का समापन गिरीश तिवारी गिर्दा समेत अन्य जनकवियों के जनगीतों से हुआ। दूसरे दिन के शो में महिलाओं की भारी संख्या ने आयोजकों को उत्साहित किया। इस दौरान मथुरादत्त मठपाल, जहूर आलम, कैलाश पांडेय, भूपेन सिंह, सुधीर विद्यार्थी, बल्ली सिंह चीमा, संजय रिखाड़ी, नवेंदु मठपाल, नवीन नैथानी, प्रभात ध्यानी, अजीत साहनी, गणेश रावत, भगवती पंत, डीएस नेगी, ऊषा पटवाल, हेम मिश्रा, पिंकी रावत, अधीर कुमार, गिरीश आर्या आदि मौजूद रहे।
फिल्म फेस्टिबल के दूसरे दिन स्थानीय प्रतिभाओं को भी अपनी प्रतिभा को उजागर करने का मौका मिला। शाईनिंग स्टार स्कूल के कक्षा 10वीं के छात्र सिदांत नेगी ने फैज अहमद फैज की नजम, आज के नाम और आज के गम के नाम एवं कबीर के भजन, उड़ जाएगा हंस अकेला गाकर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।