हल्द्वानी। तराई पूर्वी वन प्रभाग के गोल्ज्यू सभागार में बृहस्पतिवार को वन्य जीवों के प्रति अपराध की रोकथाम के लिए कार्यशाला हुई। डीएफओ हिमांशु बागरी ने कहा कि वन्य प्राणी अपराधों की रोकथाम में त्वरित एवं सुसंगत विधिक कार्रवाई जरूरी है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी।
एक दिवसीय कार्यशाला के प्रथम सत्र में प्रतिभागियों को वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के प्रावधानों, अपराधों की विवेचना प्रक्रिया, साक्ष्य संकलन, गिरफ्तारी, जब्ती, आरोप पत्र प्रेषण एवं न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता मंजुला श्रीवास्तव ने वन अपराधों से संबंधित न्यायिक प्रकरणों की सुनवाई साक्ष्य संकलन की विधि, अभियोजन की रणनीति एवं न्यायालय के व्यावहारिक पक्षों को बताया।
मॉकड्रिल का भी आयोजन
द्वितीय सत्र में वाइल्डलाइफ सोसाइटी प्रोग्राम मैनेजर टी. जोसफ ने वन्य प्राणी उत्पादों की तस्करी एवं नेटवर्क को पहचानने और अपराध रोकथाम के आधुनिक तकनीकी उपायों को बताया। प्रतिभागियों को विभिन्न टीमों में विभाजित कर मॉकड्रिल कराई गई। निर्णायकों ने सर्वश्रेष्ठ टीम को पुरस्कृत किया। विजेता टीम में वन कर्मी पुष्पा तिवारी, एन एन पाण्डे, भास्कर जोशी सम्मिलित रहे। वहां एसडीओ संतोष पंत, अनिल जोशी, रेंजर चंदन अधिकारी, घनानंद चनियाल सहित कुल 65 प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।