नैनीताल। शहर के नारायण नगर स्थित हिमालयन बॉटनिकल गार्डन में इन दिनों जैव विविधता के संरक्षण की मुहिम चल रही है। वन विभाग यहां वन्यजीवों और विशेष रूप से पक्षियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पुराने जलकुंडों की सफाई और नए कृत्रिम जलकुंडों के निर्माण में जुटा है।
नारायण नगर का इलाका घने जंगलों और शांत वातावरण के कारण दुर्लभ पक्षियों का पसंदीदा बसेरा माना जाता है। यहां बर्ड वॉचर को अक्सर चीर फीजेंट, कलीज फिजेंट, किंगफिशर और ड्रोंगो जैसे पक्षी देखने को मिलते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों की आहट के साथ जंगलों में प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगते हैं जिससे इन पक्षियों और अन्य वन्यजीवों को पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करना पड़ता है।
बॉटनिकल गार्डन के वन बीट अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया बॉटनिकल गार्डन क्षेत्र में स्थित पुराने जलकुंडों में जमा सिल्ट और मलबे को साफ किया जा रहा है ताकि उनकी जल भंडारण क्षमता बढ़ सके। ऊंचाई वाले स्थानों पर नए छोटे जलकुंड (वॉटर होल्स) बनाए जा रहे हैं। इन जलकुंडों का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों की प्यास बुझाना और घने जंगलों के बीच पानी मिलने से पक्षियों का पलायन रुकना है।
पर्यटन और शोध को मिलेगा बढ़ावा
हिमालयन बॉटनिकल गार्डन अपनी औषधीय वनस्पतियों, कैक्टस गार्डन और बटरफ्लाई म्यूजियम के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। अब जलकुंडों के सुदृढ़ीकरण से यहां पक्षियों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है जिससे नैनीताल आने वाले पर्यटकों और शोधकर्ताओं को बर्ड वाॅचिंग के बेहतर अवसर मिलेंगे। वन विभाग की यह कोशिश न केवल नैनीताल की प्राकृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक सकारात्मक संदेश भी देती है।