नैनीताल के कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों ने मंगलवार को बैठक आयोजित कर विवि की स्वायत्तता पर लगातार हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए ऐसे प्रयासों की कड़ी आलोचना की। शिक्षकों ने मोबाइल एप से बायोमेट्रिक हाजिरी नहीं लगाने का निर्णय लिया। डीएसबी परिसर में कुमाऊं विवि अध्यापक संघ की पहल पर आयोजित बैठक में प्राध्यापकों ने कहा कि यह नियम अनुकूल नहीं है। जरूरत पड़ने पर विश्वविद्यालय बचाओ आंदोलन चलाया जाएगा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा 1973 में विवि की स्थापना से ही विवि के शिक्षक, विद्यार्थियों ने स्वायत्तता के कारण ही पदम भूषण, पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों को जीता। विश्वविद्यालय प्राध्यापकों ने कहा कि किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में यह व्यवस्था लागू नहीं है। कहा कि हर छह माह में संविदा का सेवा विस्तार, पाठ्यक्रम का निर्माण, शैक्षिक कैलेंडर निर्धारण, वार्षिक छुट्टियों की तिथि, चुनाव की तिथि आदि सब कुछ शासन की ओर से किया जा रहा है जो कि व्यावहारिक नहीं है। बैठक के बाद कुलाधिपति, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, सांसद, विधायक, कुलपति, कुलसचिव, निदेशक को ज्ञापन भी भेजा गया। बैठक में प्रो. ललित तिवारी, प्रो. सावित्री कैड़ा, प्रो. ज्योति जोशी, प्रो. शुची बिष्ट, प्रो. लता पांडे, डॉ. प्रकाश चन्याल, प्रो. नीलू लोधियाल, डॉ. अशोक, प्रो. एमसी पंत, प्रो. चित्रा पांडे, डॉ. गिरीश चंद्र आदि प्राध्यापक मौजूद रहे।
न एप डाउनलोड किया, न ही लीव मैनेजमेंट बैठक में किया प्रतिभाग
विवि ने अध्यापकों से विभिन्न विवरण ऑनलाइन फॉर्म में मंगलवार तक उपलब्ध कराने, बायोमैट्रिक एप डाउनलोड करने के निर्देश दिए थे। प्रत्येक अध्यापक के लिए अपने अवकाशों का विवरण समर्थ पोर्टल के माध्यम से दर्ज कराने के लिए लीव मैनेजमेंट की प्रक्रिया सीखने के लिए दोपहर में एक मीटिंग रखी थी। प्रक्रिया का विरोध कर रहे अध्यापकों ने इन दोनों का बहिष्कार कर दिया।