ऊर्जा प्रदेश तमाम मैनेजमेंट के बाद भी निर्बाध बिजली आपूर्ति में फेल हो गया। बुधवार को हल्द्वानी, रुद्रपुर और काशीपुर में दो घंटे की कटौती करनी पड़ी।
मांग और उत्पादन में लगभग पांच मिलियन यूनिट का अंतर है। कटौती मुक्त रखने के लिए पावर कारपोरेशन ने बृहस्पतिवार को इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से पांच मिलियन यूनिट बिजली खरीद ली है।
राज्य के बिजली घरों से महज 15 से 17 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। जबकि मांग 38 से 40 मिलियन यूनिट के बीच है।
बुधवार को केंद्रीय सेक्टर और अन्य स्रोतों से बिजली लेने के बाद भी उपलब्धता कुल 34.52 मिलियन यूनिट रही। मनेरी भाली प्रथम (90 मेगावाट) से कोई विद्युत उत्पादन नहीं हुआ।
कालागाढ़ से (198 मेगावाट) से केवल 44 मेगावाट बिजली ही मिली। केंद्रीय पूल से 17.51 एमयू बिजली ली गई। जबकि मांग 39 एमयू पहुंच गई।
पावर कारपोरेशन ने ऊधमसिंह नगर में शाम साढ़े चार बजे से दो घंटे, हरिद्वार जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में चार घंटे, गढ़वाल और कुमाऊं में नान कंटिनियस इंडस्ट्री को मिलाकर तीन घंटे और हल्द्वानी, काशीपुर, रुद्रपुर एवं रुड़की में दो घंटे की कटौती की।
कारपोरेशन के जनसंपर्क अधिकारी मधुसूदन ने बताया कि पिछले वर्ष से हरियाणा से ली गई बिजली बैंकिंग के जरिए लौटाई जा रही है। मंगलवार को हरियाणा को 13 एमयू बिजली दी गई थी।