कुमाऊं विश्वविद्यालय से जुड़े महाविद्यालयों में इस बार 45 प्रतिशत से कम अंकों से इंटर उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश मिलना आसान नहीं होगा। ऑनलाइन प्रवेश के लिए आवेदन होने की वजह से प्रदेश भर से विद्यार्थियों ने आवेदन किए हैं जिसकी वजह से मेरिट काफी ऊपर जाने की उम्मीद है।
इधर, परास्नातक कक्षाओं में भी स्थानीय विद्यार्थियों को इस बार 150 अधिमान अंक न मिलने के कारण एमएससी में प्रवेश मिलना मुश्किल होगा। स्थानीय विद्यार्थियों के अगर बीएससी फाइनल में अंक कम हुए तो बाहरी विद्यार्थियों को प्रवेश लेने से कोई नहीं रोक सकेगा। इसको लेकर कुमाऊं विश्वविद्यालय काफी चिंतित है।
कुमाऊं विश्वविद्यालय में स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी को कुमाऊं का निवासी होने पर अधिमान अंकों के रूप में 50 अंक दिए जाते थे। इसके साथ ही अन्य एनसीसी, एनएसएस और अन्य कोटे के निर्धारित अंक जुड़ने से विद्यार्थी आसानी से मेरिट में आ जाते थे।
यह अधिमान अंक विद्यार्थियों के इंटरमीडिएट के पूर्णांक अंकों में जोड़कर मेरिट बनाई जाती थी। इसी तरह एमबीपीजी कालेज या दूसरे महाविद्यालय में स्नातक कक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थी को एमएससी में प्रवेश लेने पर अधिमान अंक के रूप में 150 अंक दिए जाते थे, इससे कालेज के विद्यार्थी को आसानी से एमएससी में प्रवेश मिल जाता था।
लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। केवल उच्चन्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार एनसीसी, एनएसएस, खेल और पूर्व सैनिकों के अधिमान अंक प्रवेश में विद्यार्थियों को मिल पाएंगे। इसके कारण 50 प्रतिशत से कम अंकों से इंटर उत्तीर्ण विद्यार्थियों को प्रवेश मिलना काफी मुश्किल होगा।
कुमाऊं निवासी विद्यार्थियों को जो अधिमान अंक प्रवेश के दौरान दिए जाते थे उससे स्थानीय विद्यार्थियों को आसानी से महाविद्यालयों में प्रवेश मिल जाता था। अब उच्चन्यायालय के आदेशानुसार एनसीसी, एनएसएस, खेल एवं पूर्व सैनिक कोटे में अधिमान अंक दिए जा सकेंगे। इस कारण स्थानीय विद्यार्थियों को वरीयता नहीं मिल सकेगी। इंटर में कम अंकों से उत्तीर्ण विद्यार्थियों को प्रवेश मिलने की उम्मीद नहीं है।
- डॉ. डीसी पांडेय, कुलसचिव कुमाऊं विवि