नैनीताल। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के वनस्पति विज्ञान विभाग की शोधार्थी डॉ. प्रियंका जोशी के शोध अध्ययन में तुलसी के पौधे में मलेरिया के सबसे घातक परजीवी प्लास्मोडियम फॉसिपरम के विरुद्ध दवा के अवयव होने से संबंधित प्राकृतिक दवा की खोज की गई है। इस उपलब्धि पर उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि दी गई है।
लोहाघाट के ग्राम चनोड़ा (ग्राम पंचायत गंगनौला) निवासी प्रियंका ने प्रो. सुभाष चंद्र के निर्देशन में 50 औषधीय पौधों का अध्ययन किया और इन पौधों से 1,438 फाइटोकैमिकल्स की जानकारी जुटाकर एक डाटाबेस बनाया। इनमें से 500 यौगिकों को उनकी दवा-जैसी विशेषताओं के आधार पर चुना गया।
प्रियंका ने प्रयोगशाला में शोध अध्ययन के दौरान इन यौगिकों का मॉलिक्यूलर डॉकिंग किया। इस प्रक्रिया में 28 यौगिकों में इन लक्ष्यों से मजबूत जुड़ाव पाया गया। इनमें से आठ प्रमुख यौगिकों को आगे विषाक्तता परीक्षण और मॉलिक्यूलर डायनेमिक्स सिमुलेशन के लिए चुना गया। हालांकि इनमें से कुछ यौगिक विषाक्तता में असफल रहे, लेकिन शेष यौगिकों ने गुणधर्मों को सफलतापूर्वक पार किया और प्रोटीन लक्ष्य से मजबूत जुड़ाव दिखाया।
इन यौगिकों की संरचना ने यह संकेत दिया कि ये परजीवी के जीवन-चक्र को प्रभावित कर सकते हैं। शोध में यह भी पाया कि जिन यौगिकों को डॉकिंग में अच्छे अंक मिले थे, वो सिमुलेशन में भी स्थिर इंटरेक्शन बनाए रखते हैं। यह किसी दवा की व्यावहारिक उपयोगिता को सिद्ध करता है।
एमडी सिमुलेशन इस शोध का एक अहम हिस्सा रहा, जिसने सिर्फ सैद्धांतिक अनुमानों को ही नहीं परखा बल्कि यथार्थ में दवा बनने की संभावना को भी मजबूती दी। प्रियंका के पिता त्रिलोचन जोशी बीएसएफ में जबकि मां मंजू जोशी गृहिणी हैं। उन्होंने इस सफलता का श्रेय माता-पिता, अल्मोड़ा विवि के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, गुरुजनों व परिवारजनों को दिया है।