हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी, रुद्रपुर और गरुड़ाबांज महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गंगा सिंह बिष्ट ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए उच्चशिक्षा निदेशालय को आवेदन भेज दिया है। वीआरएस का कारण उच्चशिक्षा निदेशालय के रवैये से आहत होना बताया जा रहा है। हालांकि प्राचार्य का कहना है कि अस्वस्थता के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है।
शासन ने दो फरवरी को उन्हें एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी के प्राचार्य का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा था। दो वर्ष से एमबीपीजी का नैक मूल्यांकन नहीं हो सका है। इससे महाविद्यालय को भविष्य में यूजीसी से बजट मिलने में होने वाली दिक्कत को देखते हुए प्राचार्य ने नैक का निरीक्षण कराने की प्रक्रिया शुरू की। शिक्षकों को साथ में लेकर एमबीपीजी कॉलेज को इस बार ए ग्रेड दिलाने के मकसद से काम शुरू किया।
नैक के निरीक्षण का शुल्क साढ़े चार लाख का भुगतान भी कर दिया गया। एमबीपीजी कॉलेज में तमाम कार्य कराने के लिए लोनिवि से डीपीआर बनवाकर उच्चशिक्षा निदेशालय भेजी जिसे निदेशालय ने डेढ़ माह तक स्वीकृति प्रदान नहीं की और फिर 65 लाख की डीपीआर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर होने का तर्क देकर शासन को भेज दिया।
निदेशक और प्राचार्य में डेढ़ माह से चल रही थी खींचतान
हल्द्वानी। वीआरएस को प्रभारी निदेशक उच्चशिक्षा डॉ. एससी पंत और प्राचार्य डॉ. जीएस बिष्ट के बीच एमबीपीजी कॉलेज की डीपीआर को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान से जोड़कर भी देखा जा रहा है। एमबीपीजी कॉलेज में स्मार्ट क्लासेज, गर्ल्स कॉमन रूम, रंगाई पुताई और सौंदर्यीकरण समेत विभिन्न कार्य कराने की तैयारी छात्रनिधियों में जमा पैसे की की थी। प्राचार्य खुद निदेशक से भी मिले मगर बात नहीं बनी। यह मामला उच्चशिक्षा मंत्री डॉ. धनसिंह रावत के सामने भी उठा। मंत्री ने भी प्रभारी निदेशक को निर्देश भी दिए पर मामला जस का तस ही रहा।
कोट - एमबी कॉलेज को बेहतर बनाकर दिखाना चाहता था मगर ऐसा नहीं हो सका। मैंने अपनी अस्वस्थता के चलते वीआरएस का आवेदन दिया है। वैसे अभी सेवानिवृत्ति में दो साल का वक्त है। -डॉ. जीएस बिष्ट, प्राचार्य
कोट - प्राचार्य डॉ. जीएस बिष्ट ने वीआरएस के लिए आवेदन भेजा है। मुझे नहीं मालूम उन्होंने किस वजह से वीआरएस मांगा है। उनसे वीआरएस के लिए आवेदन निर्धारित प्रारूप पर भेजने को कहा है, तभी शासन को भेजा जाएगा। - डॉ. एससी पंत, प्रभारी निदेशक उच्चशिक्षा