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दिवाली पर हर साल बढ़ रहा है प्रदूषण

Sat, 29 Oct 2016 12:33 AM IST
कैलाश्ा पाठक
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दुनिया के प्रदूषित शहर - फोटो : reuters
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शहर में वाहनों के बढ़ते दबाव और घनी आबादी के चलते प्रदूषण का स्तर साल दर साल बढ़ता जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हर साल दीपावली पर प्रदूषण के स्तर की जांच करता है। पिछले वर्ष दीपावली से पूर्व और दीपावली पर लिए गए ध्वनि और वायु प्रदूषण के स्तर में वृद्धि दर्ज की गई।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सूत्रों की मानें तो इसके लिए वाहनों का बढ़ता दबाव अधिक जिम्मेदार है। प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डीके जोशी के मुताबिक प्रदूषण का मापन तीन स्तर पर किया जाता है। इनमें आवासीय क्षेत्र, आबादी वाले क्षेत्र और स्कूल व आसपास के क्षेत्र लिए जाते हैं।

2015 में दीपावली से पूर्व पांच नवंबर को लिए गए प्रदूषण के ध्वनि प्रदूषण का स्तर में आवास विकास में 53.6 डेसीबल बीरशिव स्कूल के पास 49.8 डेसीबल, चौक बाजार में 60.5 डेसीबल आंका गया। जबकि पिछले वर्ष दीपावली पर 11 नवंबर को ध्वनि प्रदूषण आवास विकास में 74.7 डेसीबल, बीरशिवा में 72.2 डेसीबल और चौक बाजार में 78.5 डेसीबल दर्ज किया गया।
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इसी प्रकार पिछले वर्ष दीपावली से पहले पांच नवंबर को महिला अस्पताल के पास वायु प्रदूषण 127.8 माइक्रोग्राम प्रति क्यूब रिकार्ड किया गया, जबकि दीपावली पर 11 नवंबर को वायु प्रदूषण का स्तर बढ़कर 227.1 माइक्रोग्राम क्यूब प्रति मीटर तक पहुंच गया था। जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के तहत वायु प्रदूषण की स्वीकार्य सीमा 100 माइक्रोग्राम क्यूब प्रति मीटर है।

दिवाली पूर्व 119.7 माइक्रोग्राम क्यूब प्रति मीटर रहा शहर में प्रदूषण

शहर में दिवाली के अलावा भी सामान्य दिनों में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डीके जोशी के मुताबिक हर महीने ध्वनि प्रदूषण का स्तर मापा जाता है।
इसी साल अगस्त में में वायु प्रदूषण स्तर 119.4 माइक्रोग्राम क्यूब प्रति मीटर, सितंबर में 113.1 माइक्रोग्राम क्यूब प्रति मीटर और अक्तूबर में दिवाली पूर्व 119.7 माइक्रोग्राम क्यूब प्रति मीटर मापा गया है।

इसी तरह दिवाली पूर्व लिया गया ध्वनि प्रदूषण बीरशिवा स्कूल के पास 51.3 डेसीबल, आवास विकास में 55.2 डेसीबल और चौक बाजार में 59.4 डेसीबल रिकार्ड किया गया। ध्वनि प्रदूषण की स्वीकार्य सीमा इंडस्ट्रियल एरिया में दिन में 75 डेसीबल और रात में 70 डेसीबल है।

कामर्शियल एरिया में दिन में 65, रात में 55, आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45, जबकि साइलेंट जोन में दिन में 50 और रात में 40 डेसीबल है। जबकि वायु प्रदूषण की स्वीकार्य सीमा 100 माइक्रोग्राम क्यूब प्रति मीटर है।

बढ़ते प्रदूषण का मुख्य कारण पेड़ों का काटा जाना, कंक्रीट के जंगलों का पनपना और जनसंख्या घनत्व का अधिक दबाव है। इसी तरह प्रदूषण का स्तर बढ़ता गया तो मनुष्य की औसत आयु में निश्चित तौर पर कमी आएगी। प्रदूषण के बढ़ने से नई-नई बीमारियों के पनपने का भी खतरा रहता है। - प्रो. अजय रावत, पर्यावरणविद्।
वाहनों की बढ़ती संख्या, सड़कों का संकरा या कमजोर होना, पेड़ों का अंधाधुंध कटान, जनसंख्या वृद्धि और तेजी से बढ़ता शहरीकरण प्रदूषण बढ़ने का प्रमुख कारण है। बढ़ते प्रदूषण से अस्थमा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, श्रवण शक्ति का कमजोर होना, लीवर की खराबी, कैंसर आदि बीमारियां अधिक हो गई हैं। चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के कारण हालांकि फिलहाल मानव जीवन की औसत आयु में कमी नहीं आई है। मौजूदा समय में मनुष्य की औसत आयु 65 वर्ष है। लेकिन बढ़ता प्रदूषण नई बीमारियों को जन्म देगा तो औसत आय में कमी का भी खतरा है।
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- डॉ. नीलांबर भट्ट, वरिष्ठ फिजीशियन।
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