राम की नगरी, कार्बेट पार्क, मां गर्जिया देवी से प्रख्यात रामनगर अब चोरों, लुटेरों का शरण स्थल बन गया है। शहर समेत ग्रामीणों अंचलों में हुई आपराधिक घटनाओं ने पुलिस को उलझा कर रख दिया। कई घटनाओं की तहरीर कोतवाली में धूल फांक रही है। जिस कारण कई घटनाओं का खुलासा नहीं हुआ। कई घटनाओं की रिपोर्ट तक दर्ज न होने के कारण पुलिस की भूमिका भी संतोषजनक नहीं रही है।
वैसे तो कोतवाली रामनगर में कई मामलों की जांच की जा रही है लेकिन कई मामलों में एफआर लगाकर जांच बंद कर दी गई है। वर्ष 2015 के अंतिम सप्ताह से 2016 के प्रथम सप्ताह तक पीरूमदारा, टांडा, कानिया, नयागांव, बैलपड़ाव, खताड़ी, गुलरघट्टी में ताबड़तोड़ चोरियां हुईं। जिनमें कुछ घटनाओं का पुलिस ने खुलासा किया और कई लंबित हैं। दो साल पहले क्यारी रोड पर पुलिया के नीचे जलाई गई महिला की शिनाख्त तक नहीं हो सकी।
ग्राम क्यारी के एक रिसोर्ट से दो फरवरी को लापता हुए अमित पुत्र खचेडू (22) निवासी ग्राम नेहदूत कॉलोनी थाना कांठ मुरादाबाद का शव 17 मार्च को तराई पश्चिमी वन प्रभाग के ललुवागाड़ जंगल में पेड़ से लटका मिला। इस मामले में यह तक पता नहीं चला कि उसने आत्महत्या की या उसे मारा गया। एसआई लता बिष्ट बताती हैं कि मामले की जांच चल रही है। 15 फरवरी की रात अज्ञात लोगों ने ग्राम नई बस्ती कालूसैय्यद निवासी बसंती मेहरा उम्र (62) के सिर पर वार कर हत्या कर दी थी।
मामले में पुलिस ने मृतका के भतीजे की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 में मुकदमा दर्ज किया। साथ ही फॉरेंसिक, एसओजी टीम साक्ष्य एकत्र करने में जुटा दी लेकिन हत्यारे गिरफ्त से बाहर हैं। वहीं ग्राम सांवल्दे निवासी 18 वर्षीय विकलांग राजू पांडे पुत्र भगवती पांडे दो मई 2015 को बनवारी बैंकट हॉल रामनगर में विवाह समारोह से लापता हो गया। मां भगवती ने तीन मार्च को कोतवाली में जिगर के टुकड़े को खोजने की गुहार लगाते हुए तहरीर सौंपी लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। भगवती देवी बताती हैं कि इतना दुख विकलांग राजू को पालने में नहीं हुआ, जितना उसे खोने का मलाल है।
ऐसे ही न जाने कितनी भगवती देवी को अपने बच्चों के घर लौटने का इंतजार है। ग्राम टांडा मल्लू निवासी अखबार विक्रेता पर एक अप्रैल को जानलेवा हमला हुआ, जो दिल्ली के एक निजी अस्पताल में जिंदगी, मौत की जंग लड़ रहा है। उस पर हमला करने वाले नामजद आरोपी को भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
बेटी को भी इंसाफ नहीं
रामनगर। सात साल पहले दुराचार के बाद हुई हत्या भी रहस्य बनी हुई है। 17 नवंबर 2009 को शहर निवासी सात वर्षीय बेटी पैंठपड़ाव में शादी समारोह से लापता हो गई थी। 23 नवंबर को उसका शव भवानीगंज स्थित एक सुनसान खंडहर से बरामद हुआ। इस घटना से रामनगर में गुस्सा भड़क गया था। हत्यारों को पकड़ने की मांग की लेकर सड़क जाम, बाजार बंद के साथ ही तीन महीने तक आंदोलन भी हुआ। पुलिस ने जनवरी 2010 में चार लोगों का लाई डिटेक्टर टेस्ट भी कराया था। हत्याकांड का मामला विधानसभा में काफी गूंजा था। तत्कालीन सांसद सतपाल महाराज ने लोकसभा में भी उठाया था, लेकिन मामले का खुलासा नहीं हुआ। हत्यारों तक पहुंचने में नाकाम पुलिस ने केस की फाइल ही बंद कर दी। जिसकी वजह से यह घटना सिर्फ पहेली बनकर रह गयी। लोग सात सात पहले हुए इस हत्याकांड के खुलासे की आस में हैं।