साइबर ठगी के मामलों में अब पुलिस सिर्फ यही नहीं तलाशेगी कि अपराध कहां हुआ, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि ठगी का पूरा नेटवर्क किस जगह से संचालित हो रहा था। उत्तराखंड पुलिस प्रतिबिंब एप की मदद से साइबर अपराधियों के ठिकानों और उनकी गतिविधियों का पता भी लगाया जा रहा है। एप में नई सुविधा जारी की गई है। इसमें साइबर अपराधी ने कहां से बैठकर ठगी को अंजाम दिया, उसकी लोकेशन भी ट्रेस होगी। इसकी मदद से पिथौरागढ़ साइबर सेल ने देश के अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी की 99 वारदातों से जुड़े एक एनजीओ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज भी कराई है।
पुलिस के लिए साइबर ठगी की जांच में सबसे बड़ी चुनौती अपराध में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल माध्यमों के पीछे सक्रिय लोगों तक पहुंचना है। कई बार पीड़ित एक राज्य में होता है, बैंक खाता दूसरे राज्य का मिलता है और ठगी का नेटवर्क कहीं तीसरी जगह से संचालित होता है। ऐसे में प्रतिबिंब एप के जरिये सामने आने वाली लोकेशन पुलिस को जांच की दिशा तय करने में मदद कर सकती है। कुमाऊं में सामने आया एनजीओ से जुड़ा मामला इस दिशा में अहम है।
प्रतिबिंब एप के जरिये साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दे चुके लोगों की जानकारी फीड रहती है। अब उसमें यह भी ट्रेस किया जाएगा कि अपराधी की लोकेशन कहां है। एप की मदद से हमने कुमाऊं के पिथौरागढ़ में एक एनजीओ के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया है।
- नीरज भाकुनी, साइबर सेल प्रभारी