दमुवाढूंगा की भूमि के मालिकाना हक के लिए आखिरकार ग्रामीणों ने गोलज्यू दरबार में न्याय की गुहार लगा दी है। आगामी चुनाव के मद्देनजर भूमि के मालिकाना हक की मांग राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।
भाजपा मुद्दे को हवा दे रही है, जबकि कांग्रेस राजस्व गांव का दर्जा देने का जीओ जारी करवा चुकी है। मंगलवार से प्रशासनिक स्तर पर गांव के सर्वे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
दमुवाढूंगा वन भूमि पर काबिज है। यहां करीब 12 हजार से अधिक वोटर हैं। हर चुनाव की तरह इस बार भी भूमि के मालिकाना हक का मुद्दा आंदोलन में बदल चुका है। वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश के मुताबिक दमुवाढूंगा राजस्व गांव घोषित हो चुका है।
इसका जीओ भी जारी हो चुका है। जल्द ही मालिकाना हक की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। स्थानीय ग्रामीणों ने दमुवाढूंगा बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले क्रमिक अनशन शुरू किया है।
समिति संयोजक हरीश रावत और दूसरे पदाधिकारियों के मुताबिक राजस्व गांव सिर्फ चुनावी शिगूफा है। समिति पदाधिकारियों ने सोमवार को न्याय प्रिय देवता गोलज्यू के दरबार में गुहार लगाई है।
समिति पदाधिकारियों ने गोलज्यू मंदिर में अर्जी लगाकर कहा कि 1952 से ग्रामीण भूमि के मालिकाना हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। आज तक न्याय नहीं मिला है। दमुवाढूंगा नेताओं के लिए सिर्फ वोट बैंक है। समिति पदाधिकारियों ने गोलज्यू देवता से न्याय मांगा है।
बैनामा कराने पहुंचे ग्रामीण, नारेबाजी
दमुवाढूंगा बचाओ संघर्ष समिति पदाधिकारी अपनी जमीनों की रजिस्ट्री कराने सब रजिस्ट्रार और नायब तहसीलदार कार्यालय पहुंचे। कार्यालयों में बैनामा संबंधी जानकारी नहीं दिए जाने पर पदाधिकारी भड़क गए और वित्तमंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
पदाधिकारियों ने कहा कि वित्तमंत्री के बयान के बाद जनता दुविधा में है। कोई भी स्पष्ट जानकारी देने को तैयार नहीं है। जमीनों की बैनामा प्रक्रिया कब और कैसे होगी, इसकी जानकारी लेने के लिए समिति पदाधिकारी सोमवार को रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे। वहां कोई जानकारी नहीं मिलने पर नायब तहसीलदार कार्यालय पहुंचे। वहां से भी निराश होने पर प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का अनशन जारी
दमुवाढूंगा बचाओ संघर्ष समिति का क्रमिक अनशन सोमवार को भी जारी रहा। पनचक्की चौराहा पर चल रहे अनशन में समिति संयोजक हरीश रावत ने कहा कि मालिकाना हक नहीं मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस दौरान भुवन जोशी, लच्छमी दत्त पनेरू, मुकेश भट्ट, अनिल कुमार, मदनलाल, यशोदा देवी, सुमित सिंह, मनोज कुमार, खीमुली देव, मनोज कुमार, जीत राम, पूरन सिंह मेहरा और मदनराम आर्य समेत कई ग्रामीण मौजूद थे।