हल्द्वानी। ई-रिक्शा का परमिट सवारियां बैठाने के लिए जारी किया गया है, लेकिन इसे भारी सामान ढोने का वाहन बना लिया गया है। छत पर लोहे के एंगल, प्लाईबोर्ड, सरिया और अन्य सामान लेकर जा रहे ई-रिक्शा के करीब से गुजरना खतरे से खाली नहीं हैं। शहर की गड्ढों भरी सड़कों पर ये हादसों का सबब बन रहे हैं। सड़कों के स्पीड ब्रेकर पर पहुंचने पर माल लदे ई-रिक्शा पलटने से अब तक कई लोगों की जान पर बन आई है। इसके बावजूद न पुलिस-प्रशासन कोई कार्रवाई कर रहा है, न आरटीओ विभाग को किसी की सुध है।
शहर में ई-रिक्शा की संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ लोगों के लिए यह रोजगार का प्रमुख साधन है। इससे शहर के आंतरिक मार्गों पर सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था घर-घर तक पहुंच गई है, लेकिन ये तो राहत के साथ आफत भी बनने लगे हैं। अपने फायदे के लिए ई-रिक्शा चालक छत पर भारी सामान लाद रहे हैं। ई-रिक्शा की बनावट इस तरह की नहीं होती कि उस पर सामान ढोया जा सके और न ही इसके लिए परमिट होता है। इसके बावजूद बेखौफ माल ढुलाई चल रही है।
ई-रिक्शा की छत पर लगाने लगे कैरियर
हल्द्वानी। ई-रिक्शा की छत पर कैरियर लगा दिए गए हैं जिससे ज्यादा से ज्यादा सामान लादा जा सके। आरटीओ से जानकारी मिली है कि ई-रिक्शा की छत पर कैरियर लगाना प्रतिबंधित है। नियम के तहत केवल चार सवारी बैठाने की व्यवस्था होती है।
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नियम विरुद्ध है सामान लादना
परिवहन विभाग ने बताया कि ई-रिक्शा पर तय संख्या में सवारी बैठाने का ही परमिट है। अगर इससे सामान ढोया जाता है तो वह नियम के खिलाफ है। ई-रिक्शा की छत पर सामान नहीं लाद सकते हैं। एआरटीओ (प्रवर्तन) रश्मि भट्ट ने बताया कि जहां भी ई-रिक्शा सामान ले जाता हुआ दिखता है, उस पर तुरंत ही कार्रवाई की जाती है। साथ ही कुछ ई-रिक्शा सीज भी किए गए हैं।
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घरेलू विद्युत संयोजन से चार्ज करते हैं बैटरी
हल्द्वानी। ई-रिक्शा का इस्तेमाल व्यावसायिक काम में होता है, लेकिन ई-रिक्शा की बैटरी चार्ज करने का काम घरेलू विद्युत संयोजन से किया जाता है। ई-रिक्शा की बैटरी को चार्ज करने में एक बार में तीन से चार यूनिट बिजली खर्च होती है। यह भी देखने में आ रहा है कि ई-रिक्शा चालक रात को बैटरी बचाने के लिए ई-रिक्शा की हेड लाइट बंद करके चल रहे हैं।