हल्द्वानी। नगर निगम से जारी होने वाले जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इसके तहत अब एसडीएम सत्यापन नहीं कर पाएंगे। नए अधिनियम के तहत एक साल बाद जन्म और मृत्यु के प्रमाणपत्र लेने के लिए डीएम की अनुमति जरूरी होगी जबकि दो साल बाद वाले मामलों में प्रथम वर्ग के न्यायिक अधिकारी के आदेश के बाद ही सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।
इस संबंध में नगर निगम प्रशासन को केंद्र सरकार के सचिव डॉ.राजीव मणि की ओर से आदेश प्राप्त हुआ है। वर्ष 2023 के संशोधन के बाद जन्म प्रमाणपत्र को शिक्षा संस्थान में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता सूची, आधार, विवाह पंजीकरण और सरकारी नियुक्ति जैसे कई कामों में जन्मतिथि और जन्म-स्थान के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करने का प्रावधान किया गया। इसी के मद्देनजर नए अधिनियम में जन्म-मृत्यु पंजीकरण को और सख्त किया गया है।
रजिस्ट्रार को 21 दिन तक प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार
जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र का सत्यापन और पंजीकरण स्थानीय क्षेत्र के रजिस्ट्रार की ओर से किया जाता है। निकाय क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी नगर निगम, नगरपालिका या नगर पंचायत के अधिकारी के पास होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत सचिव या चिकित्सा अधिकारी इसके लिए अधिकृत हैं। 21 दिन तक रजिस्ट्रार को प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार होता है लेकिन यह अवधि बीतने के बाद फरियादियों को चक्कर लगाने पड़ते हैं।
केंद्र सरकार ने जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। अधिनियम के तहत प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया और पारदर्शी होगी।
- डॉ.सीएस टोलिया, वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी