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कोर्ट की शरण लेंगे सूखाताल के लोग

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सूखाताल निवासी-रोहित भाटिया। - फोटो : NAINITAL
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नैनीताल। जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) और नगर पालिका के सूखाताल क्षेत्र में अवैध रूप से बनाए भवनों के मालिकों को ध्वस्तीकरण संबंधी नोटिस मिलने के बाद खलबली है। क्षेत्र के लोगों ने नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण लेने की बात कही है।
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सूखाताल निवासी प्रेम सागर ने बताया कि 1954 से उनका परिवार यहां बसा है। चार पीढ़िया यहां रह चुकी हैं। अब ध्वस्तीकरण और नोटिस देकर हमें बेघर किया जा रहा है, जो सरासर गलत है। रोहित भाटिया ने बताया कि 1993 में सूखाताल में जलभराव हो गया था। इसके बाद नगर पालिका की ओर से सूखाताल में ही कर्मचारियों को आवास दिए गए। संगीता टांक ने बताया कि बिना वजह के हटाया जा रहा है। अतिक्रमण के मामले में कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों ने उम्मीद जताई कि न्यायालय उनकी याचिका पर सकारात्मक निर्णय लेगा। इस मौके पर सभासद गजाला कमाल, संजय, सोनू सहदेव, धमेंद्र प्रसाद, विश्वकेतु आदि मौजूद रहे।
यह है मामला
बता दें कि सूखाताल झील के किनारे अनाधिकृत रूप से अतिक्रमण किए निर्माणों के खिलाफ वर्ष 2012 में एक जनहित याचिका दायर की थी। इसे लेकर हाईकोर्ट ने झील किनारे मानकों के विपरीत बने मकानों के चिह्नीकरण के निर्देश प्राधिकरण और पालिका को दिए थे। वर्ष 2014 में तत्कालीन मंडलायुक्त डी.सेंथिल पांडियन के निर्देशों के बाद प्राधिकरण, सिंचाई, लोनिवि और पालिका की संयुक्त टीम ने सर्वे भी किया था। साथ ही एटीआई के तत्कालीन संयुक्त निदेशक राजीव साह की अध्यक्षता में गठित टीम की ओर से किए सर्वे में 44 भवन अतिक्रमण के दायरे में चिह्नित किए थे।
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सूखाताल की रिचार्ज क्षमता की बहाली को दायर की थी याचिका: रावत
पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत ने दावा किया है कि उन्होंने नैनीताल को ईको सेंसिटिव जोन बनाने और सूखाताल को रिचार्ज करने की व्यवस्था को बहाल करने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। इसमें सूखाताल की परिधि के बाहर के निर्माणों को लेकर आपत्ति नहीं की गई थी। पर कार्रवाई झील की परिधि से बाहर के निर्माणों पर हो रही है। प्रो. रावत ने कहा कि सूखाताल झील नैनीझील को रीचार्ज करने का एक प्रमुख स्रोत है, लेकिन अवैध निर्माणों के कारण इसकी जलभराव और रिचार्ज क्षमता बहुत कम हो गई है। रिचार्ज क्षमता की बहाली और नैनीताल को ईको सेंसिटिव जोन बनाने को लेकर ही उन्होंने याचिका दायर की थी, जिसमें झील की परिधि के बाहर के निर्माणों का जिक्र नहीं था। किंतु अब कार्रवाई झील की परिधि से बाहर के निर्माणों पर हो रही है। मामले में 15 याचिकाएं दायर हुई थी। कार्रवाई को लेकर याचिका के साथ केवल उनके ही नाम का उल्लेख करने से भी वे आहत हैं। संवाद
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